ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुंडली में चंद्रमा कमजोर या पीड़ित हो तो उसे चंद्र दोष माना जाता है। चंद्र दोष से ग्रस्त व्यक्ति को मानसिक तनाव, चिंता, अनावश्यक भय, भावनात्मक अस्थिरता और भ्रम जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे लोगों का मन बार-बार भटकता है, जिससे निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होती है। कई मामलों में नींद की समस्या, सिरदर्द और मानसिक थकान भी देखने को मिलती है।
फाल्गुन मास का चंद्रमा से खास संबंध
फाल्गुन माह को भारतीय पंचांग में भावनाओं और आनंद से जुड़ा महीना माना गया है। यह हिंदी संवत्सर का अंतिम महीना होता है, जिसमें सर्दी विदा लेती है और वसंत ऋतु का आगमन होता है। इसी महीने होली जैसे प्रमुख पर्व आते हैं, जो मन और भावनाओं को सीधे प्रभावित करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्रमा की उत्पत्ति फाल्गुन माह की पूर्णिमा को महर्षि अत्रि और माता अनुसूया से हुई थी। यही कारण है कि फाल्गुन मास में चंद्रमा की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।
फाल्गुन माह में क्यों बढ़ जाता है चंद्र दोष का असर
ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, फाल्गुन मास में चंद्रमा की ऊर्जा अत्यंत संवेदनशील मानी जाती है। चंद्रमा मन का कारक ग्रह है और इस महीने उसकी स्थिति मन, चेतना और भावनाओं पर गहरा असर डालती है। जिन लोगों की कुंडली में चंद्र दोष होता है, उनके लिए फाल्गुन माह अधिक कष्टकारी हो सकता है। इस दौरान मानसिक अशांति, भावनात्मक उतार-चढ़ाव और निर्णयों में भ्रम बढ़ सकता है। उल्लेखनीय है कि फाल्गुन माह 2 फरवरी से शुरू होकर 3 मार्च 2026 को समाप्त होगा।
चंद्र दोष से राहत पाने के ज्योतिषीय उपाय
ज्योतिष शास्त्र में चंद्र दोष को शांत करने के लिए कुछ सरल लेकिन प्रभावी उपाय बताए गए हैं। सोमवार के दिन चंद्र देव को जल अर्पित करना शुभ माना जाता है। फाल्गुन माह के प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव की विधिपूर्वक पूजा और जलाभिषेक करना मानसिक शांति प्रदान करता है। इसके साथ ही ‘ॐ सोमाय नमः’ मंत्र का नियमित जाप लाभकारी होता है। रात के समय चंद्र दर्शन कर मन ही मन प्रार्थना करना और सफेद वस्त्र, चावल, दूध व सफेद मिठाई का दान करना भी चंद्र दोष के प्रभाव को कम करने में सहायक माना गया है।
