लखनऊ: प्रदेश में पुराने बिजली मीटरों को हटाकर लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों की लागत उपभोक्ताओं से वसूली जाएगी या नहीं, इस पर अब बड़ा फैसला 18 मई को होने वाली राज्य सलाहकार समिति की बैठक में लिया जा सकता है। बिजली दर निर्धारण से पहले होने वाली इस अहम बैठक के एजेंडे में इस मुद्दे को शामिल कर लिया गया है, जिससे उपभोक्ताओं को राहत या अतिरिक्त बोझ दोनों में से किसी एक का रास्ता साफ होगा।
केंद्र के निर्देश और राज्य की नई बहस
लखनऊ: केंद्र सरकार ने स्मार्ट मीटर योजना को मंजूरी देते समय स्पष्ट निर्देश दिए थे कि इसके इंस्टॉलेशन का खर्च उपभोक्ताओं से नहीं लिया जाएगा। लेकिन अब पावर कॉरपोरेशन इस खर्च को बिजली बिल में जोड़कर वसूलने का प्रस्ताव लेकर आया है। अगर केंद्र का निर्देश ही अंतिम रूप से लागू होता है तो उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिल सकती है।
3837 करोड़ रुपये का खर्च टैरिफ में जोड़ने की मांग
बिजली कंपनियों ने स्मार्ट मीटर योजना के संचालन और रखरखाव पर वित्तीय वर्ष 2026-27 में 3837.54 करोड़ रुपये का अनुमानित खर्च बताते हुए इसे बिजली दरों में समायोजित करने की मांग नियामक आयोग से की है। हालांकि आयोग ने पहले इस प्रस्ताव पर आपत्ति जताई थी, लेकिन अब इसे राज्य सलाहकार समिति की अंतिम बैठक में फिर से शामिल किया गया है।
उपभोक्ता परिषद ने जताया कड़ा विरोध
लखनऊ: राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस प्रस्ताव को गैरकानूनी बताया है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि स्मार्ट मीटर का खर्च उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाएगा। ऐसे में इसे बिजली बिल में जोड़ना उपभोक्ताओं के साथ अन्याय होगा और बैठक में इसका कड़ा विरोध किया जाएगा।
बिजली दरों पर बढ़ सकता है अतिरिक्त बोझ
उपभोक्ता परिषद ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि वितरण कंपनियों की अन्य मांगें जैसे अतिरिक्त बिजली खरीद, लाइसेंस फीस, संचालन खर्च में छूट और राजस्व घाटे की भरपाई को मंजूरी मिलती है, तो इसका सीधा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा और बिजली दरों में बढ़ोतरी संभव है।
कंपनियों ने पेश किया खर्च का ब्योरा
बिजली वितरण कंपनियों ने नियामक आयोग को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए स्मार्ट मीटर पर प्रस्तावित खर्च का विवरण भी सौंपा है। इसमें विभिन्न क्षेत्रों की कंपनियों का अनुमानित खर्च इस प्रकार बताया गया है—
दक्षिणांचल विद्युत वितरण कंपनी: 774.47 करोड़ रुपये
मध्यांचल विद्युत वितरण कंपनी: 1008.94 करोड़ रुपये
पश्चिमांचल विद्युत वितरण कंपनी: 799.41 करोड़ रुपये
पूर्वांचल विद्युत वितरण कंपनी: 1109.97 करोड़ रुपये
केस्को: 144.74 करोड़ रुपये
अंतिम बैठक में होगा फैसला
बिजली दरों के निर्धारण से पहले होने वाली राज्य सलाहकार समिति की यह बैठक अंतिम और निर्णायक मानी जा रही है, जिसमें स्मार्ट मीटर की लागत वसूली सहित कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा होगी। इसके बाद ही इस साल की बिजली दरों पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी।
