देहरादून: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के दुर्गम नौगांव क्षेत्र में तैनात एएनएम पूजा परमार राणा ने अपनी 15 वर्षों की सेवा से स्वास्थ्य सेवा की ऐसी मिसाल कायम की है, जिसे राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है। कठिन पहाड़ी रास्तों पर सात किलोमीटर तक पैदल चलकर टीकाकरण और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने वाली पूजा को वर्ष 2026 का प्रतिष्ठित राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार प्रदान किया गया है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने दिया राष्ट्रीय सम्मान
नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस के अवसर पर दिल्ली में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने पूजा परमार राणा को यह सम्मान प्रदान किया। यह पुरस्कार नर्सिंग सेवा में असाधारण योगदान, समर्पण और जनसेवा के लिए दिया जाता है। पूजा का यह सम्मान उनके लंबे संघर्ष और सेवा भाव का राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त प्रमाण है।
दुर्गम इलाकों में पैदल चलकर पहुंचाईं स्वास्थ्य सेवाएं
देहरादून: नौगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनाती के दौरान पूजा परमार राणा ने पहाड़ों के दुर्गम इलाकों को अपनी सेवा भूमि बनाया। कंडाऊ और रस्टाडी जैसे क्षेत्रों में, जहां पहले सड़क तक नहीं थी, वहां वे आशा कार्यकर्ताओं के साथ कई किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई और जंगलों के रास्तों से होकर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाती रहीं। कई बार 5 से 6 घंटे की पैदल यात्रा के बावजूद उन्होंने कभी अपने कर्तव्य से समझौता नहीं किया।
कोरोना काल में गर्भावस्था के बावजूद निभाई जिम्मेदारी
कोरोना महामारी के दौरान वर्ष 2021 में जब देश में टीकाकरण अभियान शुरू हुआ, तब पूजा स्वयं गर्भवती थीं और उनका पूरा परिवार भी कोविड संक्रमित हो गया था। इसके बावजूद उन्होंने क्षेत्र में टीकाकरण अभियान की जिम्मेदारी संभाली और हजारों लोगों को टीका लगाकर 100 प्रतिशत वैक्सीनेशन सुनिश्चित किया।
मातृ-शिशु स्वास्थ्य में अहम योगदान
अपने 15 साल के कार्यकाल में पूजा परमार राणा ने गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया। सुरक्षित प्रसव, टीकाकरण और पोषण को लेकर उन्होंने लगातार जागरूकता और सहायता अभियान चलाया, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच मजबूत हुई।
परिवार और पृष्ठभूमि
पूजा का परिवार मूल रूप से बड़कोट के खान्सी क्षेत्र से है। उनके पति आयुर्वेद फार्मासिस्ट के रूप में आरोग्य मंदिर कुआं बड़कोट में कार्यरत हैं। उनके दो बच्चे हैं—एक बेटा उर्वक्ष और एक बेटी अनाघा। पूजा ने वर्ष 2008 में एएनएम प्रशिक्षण रानीपोखरी से पूरा किया था।
स्थानीय स्तर पर भी मिली सराहना
पूजा की इस उपलब्धि पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधिकारियों ने उन्हें बधाई दी है। उनका जीवन पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाने की चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी निभाने वाले कर्मियों के लिए प्रेरणा माना जा रहा है।
