नई दिल्ली: सनातन परंपरा और वास्तु शास्त्र में रसोईघर को घर का सबसे पवित्र स्थान माना गया है। मान्यता है कि रसोई केवल भोजन बनाने का स्थान नहीं, बल्कि परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा का प्रमुख केंद्र भी होती है। इसी कारण भोजन तैयार करते समय और उसे परोसते वक्त कुछ विशेष नियमों का पालन करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इन्हीं परंपराओं में पहली रोटी गाय और आखिरी रोटी कुत्ते को खिलाने की मान्यता भी शामिल है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह परंपरा केवल…
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12 फरवरी, माघ मास की पूर्णिमा पर होगी महाकुम्भ के कल्पवास की समाप्ति
महाकुम्भ में देश भर से आये 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किया है कल्पवास महाकुम्भ नगर। महाकुम्भ में व्रत, संयम और सतसंग का कल्पवास करने का विशिष्ट विधान है। इस वर्ष महाकुम्भ में 10 लाख से अधिक लोगों ने विधिपूर्वक कल्पवास किया है। पौराणिक मान्यता है कि माघ मास पर्यंत प्रयागराज में संगम तट पर कल्पवास करने से सहत्र वर्षों के तप का फल मिलता है। महाकुम्भ में कल्पवास करना विशेष फलदायी माना जाता है। परंपरा के अनुसार 12 फरवरी, माघ पूर्णिमा के दिन कल्पवास की समाप्ति हो रही…
Read Moreमहाकुम्भ में मकर संक्रांति पर अखाड़ों ने किया दिव्य-भव्य अमृत स्नान
अखाड़ों के आचार्य, मण्डलेश्वर, महामण्डलेश्वर अपने रथों पर सवार हो कर पहुचें करने अमृत स्नान महाकुम्भनगर। तीर्थराज, प्रयागराज में सनातन आस्था के महापर्व, महाकुम्भ के अवसर पर मंगलवार को मकर संक्रांति का अमृत स्नान संपन्न हुआ।पौराणिक मान्यता के अनुसार महाकुम्भ में मकर संक्रांति के स्नान को अमृत स्नान माना जाता है। आज भगवान सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने की तिथि पर परंपरा अनुसार साधु-संन्यासियों के अखाड़ों ने पूरे विधि-विधान से शोभा यात्रा निकालते हुए अमृत स्नान किया। सनातान परंपरा में आस्था रखने वाले श्रद्धालु अखाड़ों के अमृत स्नान…
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