लखनऊ: नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के छठवें दिन पद्मविभूषण तुलसीपीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने भगवान श्रीराम के वनवास और चित्रकूट प्रवास का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान उन्होंने चित्रकूट को केवल एक तीर्थ नहीं बल्कि रामभक्ति, त्याग, तपस्या और लोकमंगल की पावन भूमि बताते हुए इसे भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का महत्वपूर्ण केंद्र बताया। सीतापुर रोड स्थित बृज की रसोई परिसर में आयोजित कथा में स्वामी रामभद्राचार्य ने एकश्लोकी रामायण को लेकर प्रचलित धारणाओं पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह मान्यता सही नहीं है कि…
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