IIT बॉम्बे से पढ़ाई, फिर IPS बनकर बदली पुलिसिंग की तस्वीर; रेडलाइट एरिया के बच्चों को पढ़ाने वाले अवधेश दीक्षित की कहानी

भोजपुर: बिहार के नए एसपी अवधेश दीक्षित की पहचान सिर्फ एक पुलिस अधिकारी के तौर पर नहीं है। सामाजिक सरोकारों से जुड़ी उनकी पहल भी उन्हें अलग बनाती है। IIT बॉम्बे से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने यूपीएससी परीक्षा पास कर भारतीय पुलिस सेवा को चुना। मुजफ्फरपुर में एएसपी रहते हुए उन्होंने गरीब और वंचित बच्चों के लिए पुलिस पाठशाला शुरू की। इतना ही नहीं, वह रेडलाइट एरिया के बच्चों को भी पढ़ाया करते थे।

IIT बॉम्बे से इंजीनियरिंग, फिर UPSC का सफर

अवधेश दीक्षित 2019 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। उन्होंने IIT बॉम्बे से इंजीनियरिंग में स्नातक की पढ़ाई की। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद उन्होंने प्रशासनिक सेवा में जाने का फैसला किया और संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा की तैयारी शुरू की।

कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने यूपीएससी परीक्षा में सफलता हासिल की और भारतीय पुलिस सेवा को अपना करियर चुना। वर्ष 2019 में वह आईपीएस प्रशिक्षण के लिए मसूरी पहुंचे। एक साक्षात्कार में अवधेश दीक्षित ने यह भी कहा था कि यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा की तुलना में आईआईटी की प्रवेश परीक्षा ज्यादा कठिन होती है।

बेगूसराय से शुरू हुआ पुलिस सेवा का सफर

बिहार कैडर मिलने के बाद अवधेश दीक्षित ने बेगूसराय से पुलिस सेवा की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने पालीगंज में एएसपी के रूप में जिम्मेदारी संभाली। मुजफ्फरपुर में तैनाती के दौरान उनकी सामाजिक पहल चर्चा में आई।

गरीब और वंचित बच्चों के लिए उन्होंने पुलिस पाठशाला की शुरुआत की। इसके जरिए बच्चों को पढ़ाई से जोड़ने की कोशिश की गई। रेडलाइट एरिया में रहने वाले बच्चों को भी वह पढ़ाते थे। उनकी इस पहल ने पुलिस की भूमिका को केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित रखने के बजाय समाज के कमजोर वर्गों तक पहुंचाने का उदाहरण पेश किया।

गोपालगंज और लखीसराय में भी संभाली एसपी की जिम्मेदारी

मुजफ्फरपुर के बाद अवधेश दीक्षित ने गोपालगंज और लखीसराय के एसपी की जिम्मेदारी भी संभाली। अलग-अलग जिलों में तैनाती के दौरान पुलिस सेवा के साथ सामाजिक सरोकारों को लेकर उनकी पहचान बनी।

अवधेश दीक्षित की निजी जिंदगी भी चर्चा में रही है। वह पूर्व आईपीएस अधिकारी काम्या मिश्रा के पति हैं। दोनों की मुलाकात वर्ष 2019 में आईपीएस प्रशिक्षण के दौरान हुई थी।

पहली मुलाकात सिर्फ 10-15 मिनट की थी

काम्या मिश्रा ने एक साक्षात्कार में बताया था कि प्रशिक्षण के दौरान अवधेश दीक्षित से उनकी पहली मुलाकात महज 10 से 15 मिनट की हुई थी। अवधेश ने इस मुलाकात को मजाकिया अंदाज में याद करते हुए कहा था कि पहली नजर में ही उनके दिल पर ‘लाठी चार्ज’ हो गया था। हालांकि, संकोची स्वभाव के कारण वह उस समय अपनी भावनाएं जाहिर नहीं कर पाए।

इसके बाद मध्य प्रदेश के रतलाम में फील्ड विजिट के दौरान काम्या ने पहल करते हुए अवधेश के सामने अपने प्यार का इजहार किया। उस समय उनके पास अंगूठी नहीं थी। दोनों ने घास से छोटी सी अंगूठी बनाई और काम्या ने उसे अवधेश को पहनाया। यह घास की अंगूठी उनके रिश्ते की पहली निशानी बनी।

2020 में कोर्ट मैरिज, बाद में उदयपुर में शादी

वर्ष 2020 में अवधेश दीक्षित और काम्या मिश्रा ने कोर्ट मैरिज की। इसके बाद उदयपुर में दोनों ने डेस्टिनेशन वेडिंग भी की। काम्या मूल रूप से ओडिशा की रहने वाली हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने करीब 22 वर्ष की उम्र में यूपीएससी परीक्षा में 172वीं रैंक हासिल की थी और आईपीएस अधिकारी बनी थीं।

काम्या मिश्रा बिहार कैडर में सेवा दे चुकी हैं। वर्ष 2024 में उन्होंने पारिवारिक व्यवसाय की जिम्मेदारी संभालने के लिए पुलिस सेवा से इस्तीफा दे दिया था।

 

Related posts