नई दिल्ली: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण के बाद बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने चुनाव आयोग को घेरने के लिए एक गढ़े हुए झूठ को अपने आरोपों का आधार बनाया। नितिन नवीन ने कहा कि SIR को लेकर विपक्ष जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहा था।
‘संवैधानिक संस्थाओं पर हमला किया’
नितिन नवीन की यह टिप्पणी चुनाव आयोग के उस बयान के बाद आई है, जिसमें आयोग ने स्पष्ट किया कि SIR से जुड़े सभी आदेश तीनों निर्वाचन आयुक्तों की सर्वसम्मति से जारी किए गए थे। आयोग ने यह भी कहा कि मतदाता पंजीकरण के लिए फॉर्म-6 में किए गए बदलावों को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है।
नितिन नवीन ने कहा कि चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि SIR से जुड़े सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। इसके बावजूद कांग्रेस ने एक मनगढ़ंत झूठ के आधार पर आरोप लगाए और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल खड़े किए।
‘लोकतंत्र का सम्मान चुनिंदा तौर पर नहीं हो सकता’
बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि SIR के मुद्दे पर जनता को गुमराह करने को लेकर विपक्ष एक बार फिर बेनकाब हुआ है। उन्होंने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर दोहरे रवैये का आरोप लगाते हुए कहा कि जब यही चुनावी प्रक्रिया केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में उन्हें जीत दिलाती है, तब वे इसकी विश्वसनीयता स्वीकार करते हैं।
नितिन नवीन ने कहा कि जब किसी अन्य जगह पर जनादेश उनके खिलाफ जाता है, तो वही दल चुनाव कराने वाली संस्थाओं पर सवाल उठाने लगते हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र का सम्मान चुनिंदा तौर पर नहीं किया जा सकता।
‘दुर्भावनापूर्ण दुष्प्रचार बेहद दुर्भाग्यपूर्ण’
नितिन नवीन ने कहा कि लोकतंत्र में जीत और हार स्वाभाविक हिस्सा हैं। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि सम्मानित संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को कमजोर करने के लिए दुर्भावनापूर्ण दुष्प्रचार का सहारा लेना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
EC ने SIR पर क्या कहा?
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर उठे सवालों और SIR पर जारी विवाद के बीच चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को आधिकारिक बयान जारी किया। आयोग के महानिदेशक (मीडिया) आशीष गोयल ने बताया कि नई दिल्ली स्थित निर्वाचन सदन में आयोग की बैठक हुई, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू तथा डॉ. विवेक जोशी मौजूद थे।
आयोग ने कहा कि मतदाता सूचियों के विशेष पुनरीक्षण से जुड़े सभी निर्णय तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मति और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए लिए गए हैं।
