घुंघचाई (पूरनपुर)। महाशिवरात्रि का पर्व नजदीक आते ही क्षेत्र में धार्मिक उत्साह चरम पर है। शिवालयों में साफ-सफाई, रंग-रोगन और विशेष सजावट का काम तेज़ी से जारी है। प्रशासन भी पेयजल, प्रकाश और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तैयारियों में जुटा है। बाजारों में रौनक बढ़ चुकी है और शिवभक्तों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।
महाशिवरात्रि हर वर्ष फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है। इस वर्ष 15 फरवरी, रविवार को यह महापर्व मनाया जाएगा। हिंदू मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। यह पर्व शिव और शक्ति के दिव्य मिलन का प्रतीक माना जाता है।
घने जंगलों के बीच आस्था का केंद्र—बाबा इकोत्तरनाथ मंदिर
गोमती नदी के शांत तट पर, घने जंगलों के बीच स्थित बाबा इकोत्तरनाथ मंदिर श्रद्धा और विश्वास का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। प्राकृतिक वातावरण में बसे इस प्राचीन मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
यहां स्थापित शिवलिंग को लेकर मान्यता है कि वह दिन में तीन बार अपना रंग बदलता है। इस अद्भुत स्वरूप को देखने के लिए भक्तों में विशेष उत्सुकता रहती है, खासकर महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां भारी भीड़ उमड़ती है।
इंद्रदेव की स्थापना से जुड़ी मान्यता
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार देवराज इंद्र ने गौतम ऋषि के श्राप से मुक्ति पाने के लिए गोमती नदी के किनारे 71 शिवलिंगों की स्थापना की थी। यह स्थल उन्हीं में से एक माना जाता है, इसी कारण इसे ‘इकोत्तरनाथ’ नाम से जाना जाता है। कहा जाता है कि मुख्य मंदिर में स्थापित शिवलिंग दिन में तीन अलग-अलग स्वरूप धारण करता है, जिसे भक्त चमत्कारिक मानते हैं।
महाशिवरात्रि पर यहां विशाल मेला आयोजित होता है। जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए लंबी कतारें लगती हैं। मंदिर में मनौती मांगने की भी विशेष परंपरा है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना यहां अवश्य पूर्ण होती है। मनोकामना पूरी होने पर भक्त मंदिर परिसर में नल लगवाते हैं। परिसर में लगे हजारों नल श्रद्धालुओं की आस्था और सेवा भाव की मिसाल पेश करते हैं।
जंगल के बीच कठिन रास्ता, फिर भी उमड़ती है भीड़
मंदिर तक पहुंचने का रास्ता जंगल से होकर गुजरता है और कई स्थानों पर मार्ग खराब है, इसके बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं दिखती। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मंदिर केवल धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की पहचान बन चुका है।
इस बार महाशिवरात्रि पर संभावित भीड़ को देखते हुए श्रद्धालुओं ने प्रशासन से बेहतर सड़क, प्रकाश और अन्य सुविधाओं की मांग की है।
प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने पूरी की तैयारी
डीसीए मनरेगा एवं प्रभारी बीडीओ पूरनपुर हेमंत कुमार ने बताया कि महाशिवरात्रि से पहले जंगल के खराब रास्तों को दुरुस्त कराया जाएगा। मंदिर परिसर में साफ-सफाई और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आवश्यक इंतजाम किए जा रहे हैं। सुरक्षा और प्रकाश व्यवस्था को भी सुदृढ़ किया जा रहा है, ताकि किसी प्रकार की असुविधा न हो।
मंदिर के पुजारी निरंकार गिरी के अनुसार, 15 फरवरी को अधिक संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। मंदिर की रंगाई-पुताई पूरी कर ली गई है और इसे आकर्षक रूप से सजाया जा रहा है। रात्रि में रुकने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं।
प्राकृतिक सौंदर्य, गहरी आस्था और चमत्कारिक मान्यताओं से जुड़ा बाबा इकोत्तरनाथ मंदिर एक बार फिर महाशिवरात्रि पर भक्तों की आस्था का केंद्र बनने जा रहा है, जहां जंगल की शांति में गूंजती घंटियां श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक सुकून का अनुभव कराती हैं।
