पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने शनिवार को लुधियाना में इंडस्ट्रियल एंड बिजनेस डेवलपमेंट पॉलिसी 2026 की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि उनकी सरकार बड़े सुधारों और उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप तैयार किए गए लचीले प्रोत्साहन ढांचे के जरिए पंजाब को देश का नंबर-1 निवेश केंद्र बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में औद्योगिक विकास को गति देने, बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करने और प्रदेशभर में रोजगार के नए अवसर पैदा करने के उद्देश्य से औद्योगिक नीति में व्यापक बदलाव किए गए हैं।
निवेशकों को मिलेगा अपनी जरूरत के अनुसार पैकेज चुनने का विकल्प
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब में पहले से ही रिकॉर्ड स्तर पर निवेश देखने को मिला है और नई नीति इसे और मजबूत बनाएगी। उन्होंने बताया कि इस नीति के तहत निवेशकों को 20 तक प्रोत्साहनों में से अपनी जरूरत के अनुसार विकल्प चुनने और अपने व्यापार मॉडल के मुताबिक पैकेज तैयार करने की सुविधा दी गई है।
इसके साथ ही राज्य में पहली बार पूंजी सब्सिडी की व्यवस्था शुरू की गई है। नई नीति के तहत स्थायी पूंजी निवेश पर 100 प्रतिशत तक प्रोत्साहन देने का प्रावधान किया गया है। रोजगार सृजन सब्सिडी की पात्रता भी कम कर दी गई है, जिसमें अब 25 करोड़ रुपये निवेश और 50 कर्मचारियों के आधार पर उद्योग इस योजना का लाभ ले सकेंगे। इससे विनिर्माण, सेवाओं और उभरते तकनीकी क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई गई है।
औद्योगिक प्रोत्साहन संरचना में बड़ा बदलाव
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि नई नीति राज्य में औद्योगिक प्रोत्साहन की पूरी व्यवस्था में बड़ा बदलाव लेकर आई है। उन्होंने कहा कि देश के अधिकांश राज्यों में निवेशकों को तय विकल्प दिए जाते हैं, जहां उन्हें वही स्वीकार करने पड़ते हैं। लेकिन पंजाब ने इस व्यवस्था को बदल दिया है। अब निवेशक अपनी जरूरत के मुताबिक 20 तक प्रोत्साहनों में से विकल्प चुनकर खुद का पैकेज तैयार कर सकते हैं।
अलग-अलग उद्योगों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई नीति
मुख्यमंत्री ने कहा कि अलग-अलग उद्योगों की कार्यप्रणाली और लागत संरचना अलग होती है, इसलिए एक जैसी नीति सभी क्षेत्रों पर लागू नहीं हो सकती। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि फार्मास्यूटिकल कंपनियों की जरूरतें इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण इकाइयों से अलग होती हैं, वहीं डेटा सेंटर की लागत संरचना टेक्सटाइल उद्योग से बिल्कुल अलग होती है। नई नीति इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है।
प्रोत्साहन अवधि को 15 साल तक बढ़ाया गया
मुख्यमंत्री ने बताया कि नई औद्योगिक नीति निवेशकों को लंबे समय तक स्थिरता देने के लिए तैयार की गई है। इसके तहत प्रोत्साहन अवधि को बढ़ाकर 15 वर्ष तक कर दिया गया है, जबकि अधिकांश राज्यों में यह अवधि पांच से दस वर्ष के बीच होती है। उन्होंने कहा कि यह प्रावधान विशेष रूप से पूंजी आधारित उद्योगों के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित होगा।
फिक्स्ड कैपिटल इन्वेस्टमेंट की परिभाषा का दायरा बढ़ा
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि स्थायी पूंजी निवेश की परिभाषा का दायरा बढ़ाया गया है, जिससे प्रोत्साहनों की गणना का आधार भी विस्तृत हो जाएगा। इससे पर्यावरणीय स्थिरता और नियामकीय अनुपालन पर होने वाले निवेश को भी वित्तीय सहयोग मिल सकेगा। उन्होंने बताया कि नई नीति का उद्देश्य छोटे कारोबारों के लिए औद्योगिक प्रोत्साहनों को अधिक सुलभ बनाना भी है।
छोटे उद्योगों को मिलेगा सबसे बड़ा लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले की नीतियों में कई छोटे और मध्यम उद्योग इन योजनाओं से बाहर रह जाते थे। उन्होंने पंजाब की अर्थव्यवस्था में छोटे उद्योगों की अहम भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि राज्य की औद्योगिक ताकत केवल बड़े कारखानों से नहीं बल्कि लुधियाना, जालंधर, बटाला और गोबिंदगढ़ जैसे शहरों में काम कर रहे हजारों छोटे निर्माताओं से भी बनती है।
उन्होंने कहा कि ये उद्योग सीमित मुनाफे के बावजूद बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार देते हैं। नई नीति के तहत उन्हें प्रोत्साहन ढांचे में शामिल कर ऐसे उद्योगों को मजबूत करने का प्रयास किया गया है, जो हर निवेश के साथ ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार देने की क्षमता रखते हैं।
