लखनऊ में महिला आरक्षण बिल को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन ने अब सियासी विवाद का रूप ले लिया है। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष और मुलायम सिंह यादव की बहू अपर्णा यादव द्वारा विधानसभा के सामने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का झंडा जलाए जाने के बाद सपा कार्यकर्ताओं में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। इस पूरे मामले को लेकर लखनऊ के हजरतगंज कोतवाली में अपर्णा यादव के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग उठी है।
अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया—भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचनी चाहिए
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी के भी इमोशन को आहत नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर वह ज्यादा टिप्पणी नहीं करना चाहते, लेकिन यह सभी जानते हैं कि रंगों का संबंध किसी न किसी धर्म और आस्था से होता है। उन्होंने लाल रंग का जिक्र करते हुए कहा कि यह क्रांति का प्रतीक है, देवी-देवताओं से जुड़ा है, हनुमान जी का रंग है और सामाजिक परंपराओं में भी इसका विशेष महत्व है। ऐसे में किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना उचित नहीं है।
हजरतगंज कोतवाली में दी गई तहरीर, केस दर्ज करने की मांग
इस मामले में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव प्रदीप कुमार ने रविवार को प्रतिनिधिमंडल के साथ हजरतगंज कोतवाली पहुंचकर तहरीर दी। उन्होंने अतिरिक्त निरीक्षक से मुलाकात कर अपर्णा यादव के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की। तहरीर में आरोप लगाया गया कि शनिवार रात अपर्णा यादव अपने समर्थकों के साथ विधानभवन के सामने पहुंचीं, जहां उन्होंने नारेबाजी करते हुए सपा और कांग्रेस का झंडा जला दिया।
कार्यकर्ताओं में आक्रोश, आंदोलन की चेतावनी
सपा नेताओं का कहना है कि झंडा जलाने की इस घटना से पार्टी कार्यकर्ताओं की भावनाएं आहत हुई हैं। उनका आरोप है कि इस तरह की कार्रवाई से माहौल खराब करने की कोशिश की गई है। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि यदि जल्द ही मुकदमा दर्ज नहीं किया गया, तो बड़ी संख्या में कार्यकर्ता सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।
पुलिस ने शुरू की जांच
एसीपी हजरतगंज विकास जायसवाल ने बताया कि प्राप्त तहरीर के आधार पर मामले की जांच की जा रही है और जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मेरठ समेत कई जिलों में विरोध प्रदर्शन
इस घटना का असर प्रदेश के अन्य जिलों में भी देखने को मिला। मेरठ में सपा कार्यकर्ताओं ने अपर्णा यादव के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए उनका पुतला फूंका। यह प्रदर्शन सपा नेत्री नेहा गौड़ के नेतृत्व में किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए।
