चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट! फरवरी के मुकाबले ₹1.06 लाख सस्ता हुआ किलो, दिवाली पर सिक्कों और लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों की बढ़ी मांग

मुरादाबाद: दीपावली से पहले चांदी की कीमतों में आई भारी गिरावट ने ग्राहकों को खरीदारी का अच्छा मौका दिया है। फरवरी 2026 में जिस चांदी का भाव 2.95 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया था, वह 2 नवंबर को घटकर 1,88,900 रुपये प्रति किलो रह गया। यानी अपने उच्चतम स्तर से चांदी 1,06,100 रुपये प्रति किलो सस्ती हो चुकी है। कीमतों में आई इस नरमी के बीच सराफा बाजार में त्योहार की खरीदारी को लेकर उत्साह बढ़ा है।

पिछले एक साल के दौरान चांदी के भाव में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। 2 नवंबर 2025 को एक किलो चांदी की कीमत 1,53,300 रुपये थी। इसके बाद 15 नवंबर को भाव बढ़कर 1,90,000 रुपये और 14 दिसंबर को 2,38,000 रुपये प्रति किलो पहुंच गया।

फरवरी में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था चांदी का भाव

साल 2026 की शुरुआत में भी चांदी की कीमतों में तेजी जारी रही। 6 जनवरी को इसका भाव 2,48,500 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया, जबकि 4 फरवरी को यह बढ़कर 2,95,000 रुपये तक पहुंच गया। इसके बाद कीमतों में गिरावट का दौर शुरू हुआ। जून में चांदी 2,58,500 रुपये प्रति किलो पर आ गई और 2 नवंबर तक इसका भाव घटकर 1,88,900 रुपये रह गया।

इस तरह फरवरी के सबसे ऊंचे स्तर की तुलना में चांदी 1,06,100 रुपये प्रति किलो सस्ती हो गई है। चांदी कारोबारियों संजय कट्टा और सर्राफ फूल कुमार के मुताबिक, कीमतों में कमी आने से ग्राहकों की दिलचस्पी फिर बढ़ी है।

दिवाली पर चांदी के सिक्कों और लक्ष्मी-गणेश की मांग

दीपावली पर चांदी के सिक्के खरीदना शुभ माना जाता है। इसी परंपरा के चलते इस बार भी बाजार में एक, पांच और दस ग्राम के सिक्कों की मांग बनी हुई है। इनके अलावा चांदी की लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां, छोटी कटोरियां और पूजा में इस्तेमाल होने वाली दूसरी वस्तुएं भी ग्राहक पसंद कर रहे हैं।

कम वजन में आकर्षक डिजाइन वाले उत्पादों का बढ़ा चलन

सराफा कारोबारी अभिनव बंसल के अनुसार, ग्राहक अपनी आर्थिक क्षमता और बजट को ध्यान में रखते हुए कम वजन वाले चांदी के उत्पाद खरीद रहे हैं। डाई कास्टिंग तकनीक से तैयार आकर्षक डिजाइन वाली वस्तुओं की भी मांग बढ़ी है। इन उत्पादों की खासियत यह है कि कम वजन में भी इनकी बनावट और डिजाइन बेहतर मिलते हैं।

सोने के मुकाबले चांदी के उपहार अपेक्षाकृत बजट में उपलब्ध होने के कारण लोग इन्हें रिश्तेदारों और परिचितों को शगुन के रूप में देने के लिए भी खरीद रहे हैं। कारोबारियों को धनतेरस पर चांदी के सिक्कों और छोटे उपहारों की बिक्री में और तेजी आने की उम्मीद है।

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