लखनऊ: केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक सुधारों और सरकारी कर्मचारियों के क्षमता विकास के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश ने इस क्षेत्र में देश के सामने उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने बताया कि मिशन कर्मयोगी के तहत उत्तर प्रदेश का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा है। आई-गॉट कर्मयोगी पोर्टल पर प्रदेश के 19 लाख से अधिक कार्मिक पंजीकृत हैं और प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरे करने के मामले में भी राज्य ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को केवल नियमों के आधार पर काम करने वाली व्यवस्था से आगे बढ़कर जिम्मेदारी और भूमिका के अनुरूप काम करने वाली प्रणाली बनाना जरूरी है।
2014 से प्रशासनिक सुधारों पर जोर, भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की पहल
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2014 से प्रशासनिक सुधारों को प्राथमिकता दी गई है। इसका उद्देश्य सरकारी सेवाओं को सरल, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना तथा नागरिकों का विश्वास बढ़ाना रहा है। उन्होंने राजपत्रित अधिकारियों से दस्तावेजों के सत्यापन की अनिवार्यता समाप्त करने और सरकारी नौकरियों में भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने जैसे कदमों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के आह्वान के बाद भर्ती प्रक्रिया में साक्षात्कार की व्यवस्था समाप्त करने की दिशा में भी पहल की गई, ताकि चयन में भेदभाव की आशंकाएं कम की जा सकें।
रोजगार मेले और डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र से नागरिकों को सुविधा
केंद्रीय मंत्री ने रोजगार मेले, केंद्रीयकृत लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (सीपीग्राम्स) और डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र जैसी पहलों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र में बायोमेट्रिक और चेहरे की पहचान करने वाली तकनीक के इस्तेमाल से पेंशनभोगियों को सुविधा मिली है। डॉ. सिंह के मुताबिक, प्रशासनिक व्यवस्था में नियम आधारित कार्यप्रणाली से आगे बढ़कर भूमिका आधारित व्यवस्था अपनाने की जरूरत है। मिशन कर्मयोगी और आई-गॉट कर्मयोगी मंच इसी दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
आई-गॉट पर यूपी के 19 लाख से अधिक कार्मिक पंजीकृत
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि देशभर में आई-गॉट कर्मयोगी मंच पर लगभग 1.70 करोड़ सरकारी कार्मिक पंजीकृत हैं। इनमें उत्तर प्रदेश के 19 लाख से अधिक कर्मचारी शामिल हैं। प्रदेश में योग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे विषयों पर भी बड़ी संख्या में प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरे किए गए हैं। वहीं, उन्नति पोर्टल पर उत्तर प्रदेश के 350 से अधिक प्रशिक्षण संस्थानों और प्रशिक्षण इकाइयों का पंजीकरण हुआ है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सुशासन और प्रशासनिक क्षमता विकास के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी भूमिका निभाता रहेगा। उन्होंने प्रदेश सरकार, अधिकारियों और प्रशिक्षण संस्थानों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यहां के अनुभव दूसरे राज्यों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकते हैं।
योजनाओं की सफलता का पैमाना आम नागरिक तक पहुंचने वाला लाभ: मुख्य सचिव
उत्तर क्षेत्रीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एसपी गोयल ने कहा कि सरकारी योजनाओं की सफलता केवल उनकी संख्या से तय नहीं होती, बल्कि यह देखना जरूरी है कि उनका लाभ आम नागरिक तक कितनी प्रभावी, पारदर्शी और समान रूप से पहुंच रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में ई-पोर्टल पर 19 लाख से अधिक सरकारी कार्मिक पंजीकृत हो चुके हैं। इनके माध्यम से लगभग 3.75 करोड़ प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरे किए गए हैं और 47 करोड़ से अधिक लर्निंग आवर्स दर्ज किए गए हैं।
मुख्य सचिव ने इस उपलब्धि में योगदान देने वाले सभी विभागों, अधिकारियों और कर्मचारियों की सराहना की। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के 350 से अधिक प्रशिक्षण संस्थान और प्रशिक्षण इकाइयां उन्नति पोर्टल पर पंजीकृत हैं, जो देश में सर्वाधिक हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के अनुरूप प्रशासन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और नई तकनीकों के इस्तेमाल को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
दक्ष और नागरिक-केंद्रित सिविल सेवाओं पर जोर
क्षमता विकास आयोग की अध्यक्ष एस. राधा चौहान ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने के लिए सक्षम, दक्ष और नागरिक केंद्रित सिविल सेवाओं का निर्माण आवश्यक है। इसके लिए मिशन कर्मयोगी के तहत भूमिका आधारित प्रशिक्षण व्यवस्था को दक्षता आधारित प्रणाली में बदलना होगा। उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारियों का प्रशिक्षण उनकी जिम्मेदारियों और कार्यक्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप होना चाहिए, ताकि वे नागरिकों को बेहतर सेवाएं दे सकें।
साधना सप्ताह में शुरू हुईं क्षमता विकास से जुड़ी पहल
एस. राधा चौहान ने बताया कि अप्रैल में आयोजित साधना सप्ताह के दौरान उन्नति अभियान, कर्मयोगी कर्तव्य कार्यक्रम और कर्मयोगी क्वालिटी फ्रेमवर्क जैसी पहल शुरू की गई थीं। कर्मयोगी कर्तव्य कार्यक्रम का उद्देश्य विशेष रूप से अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों में सेवा भाव विकसित करना है, जबकि कर्मयोगी क्वालिटी फ्रेमवर्क के माध्यम से प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।
उत्तर क्षेत्रीय कार्यशाला में आठ राज्यों और चार केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यशाला के दौरान प्रशिक्षण संस्थानों की क्षमता बढ़ाने और आधुनिक प्रशिक्षण पद्धतियों को अपनाने पर जोर दिया गया, ताकि भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप सक्षम, दक्ष और जवाबदेह प्रशासनिक व्यवस्था विकसित की जा सके।
