नई दिल्ली: बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने इस्तीफे की मांग को सिरे से खारिज कर दिया है। वकीलों के एक समूह के विरोध के बाद उन्होंने साफ कहा कि वह चुनकर इस पद पर आए हैं, इसलिए इस्तीफा देने का कोई सवाल नहीं है। उन्होंने कहा कि वह 12 से 14 साल तक बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन के तौर पर काम कर चुके हैं और देशभर के करीब 25 लाख वकीलों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
वकीलों ने क्यों किया विरोध प्रदर्शन
मनन कुमार मिश्रा का यह बयान उस विरोध प्रदर्शन के एक दिन बाद आया, जिसमें दिल्ली की अलग-अलग बार एसोसिएशनों से जुड़े वकील नई दिल्ली स्थित बार काउंसिल ऑफ इंडिया के कार्यालय के बाहर जुटे थे। प्रदर्शनकारी वकीलों ने उनके लंबे कार्यकाल समेत कई मुद्दों को लेकर सवाल उठाए और चेयरमैन के इस्तीफे की मांग की।
वकीलों की प्रमुख आपत्तियों में अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम लागू नहीं होना और वकीलों के पंजीकरण शुल्क में प्रस्तावित बढ़ोतरी शामिल थी।
अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम लागू करने की मांग
प्रदर्शन कर रहे वकीलों ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के कामकाज में अनियमितताओं के आरोप लगाए। उनकी मांगों में अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम लागू करना, सभी वकीलों को बीमा सुरक्षा देना और विधि महाविद्यालयों के नियमित एवं पारदर्शी निरीक्षण की व्यवस्था करना शामिल था।
प्रदर्शन का आह्वान ऑल इंडिया यंग एडवोकेट्स एसोसिएशन ने किया था, जबकि कॉकरोच जनता पार्टी ने इसे समर्थन दिया था।
नालसार के छात्रों के मामले से शुरू हुआ विवाद
बीसीआई चेयरमैन और वकीलों के बीच मौजूदा विवाद की पृष्ठभूमि नालसार विश्वविद्यालय के छात्रों से जुड़े मामले से भी जुड़ी है। विश्वविद्यालय के छात्रों ने भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत को अपने दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि बनाए जाने का विरोध किया था।
इस पर मनन कुमार मिश्रा ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए राज्य बार परिषदों को एक परिपत्र जारी किया था। इसमें छात्रों को बतौर वकील पंजीकरण नहीं देने का निर्देश दिया गया था।
सीजेआई की फटकार के बाद वापस लेना पड़ा आदेश
बीसीआई के इस कदम की कानूनी क्षेत्र में आलोचना हुई। इसके बाद प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने भी बार काउंसिल ऑफ इंडिया के रुख पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मामला छात्रों और उनके बीच संवाद से जुड़ा है।
इसके बाद मनन कुमार मिश्रा को अपना आदेश वापस लेना पड़ा। उन्होंने अपनी टिप्पणी पर खेद जताते हुए कानून के छात्रों से माफी भी मांगी थी।
