यूपी में मकानों के नक्शे पास कराने की व्यवस्था बदलेगी, जिला पंचायतों के लिए नई भवन निर्माण उपविधि लाने की तैयारी

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों में भवन निर्माण और विकास कार्यों को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए योगी सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य सरकार जिला पंचायतों के माध्यम से नक्शा स्वीकृति प्रक्रिया को नए ढांचे में लाने की तैयारी कर रही है। इसके तहत “उत्तर प्रदेश जिला पंचायतों के लिए मॉडल भवन निर्माण एवं विकास उपविधि-2026” लागू करने की योजना बनाई गई है।

प्रस्तावित उपविधि को अंतिम रूप देने से पहले विभिन्न हितधारकों के साथ चर्चा की जाएगी। इस संबंध में शनिवार को एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है, जिसमें बिल्डर, आर्किटेक्ट, जिला पंचायतों के अधिकारी और अन्य संबंधित पक्ष शामिल होंगे। बैठक में प्रस्तावित नियमों पर सुझाव और आपत्तियां भी आमंत्रित की जाएंगी।

ग्रामीण क्षेत्रों में सुनियोजित विकास पर रहेगा फोकस

नई व्यवस्था का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में भवन निर्माण को नियोजित और मानक आधारित बनाना है। इसके साथ ही जिला पंचायतों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद जताई जा रही है।

पंचायती राज विभाग द्वारा तैयार किए गए मसौदे में भवनों के नक्शे की स्वीकृति के लिए अलग-अलग शुल्क निर्धारित करने का प्रस्ताव है। शुल्क का निर्धारण भवन के क्षेत्रफल, उपयोग और अन्य मानकों के आधार पर किया जाएगा। आवासीय और व्यावसायिक भवनों के लिए अलग-अलग शुल्क संरचना लागू की जा सकती है।

जिला पंचायतों की आय तीन गुना तक बढ़ने की उम्मीद

राज्य सरकार का मानना है कि नई उपविधि लागू होने के बाद जिला पंचायतों की आय में बड़ा इजाफा होगा। वर्तमान में नक्शा स्वीकृति से जिला पंचायतों को लगभग 70 करोड़ रुपये की आय प्राप्त होती है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह आंकड़ा बढ़कर करीब 210 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।

प्रस्तावित उपविधि को पहले ही सैद्धांतिक स्वीकृति मिल चुकी है और अब इसे लागू करने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

ऊंची इमारतों के लिए एफएआर मंजूरी प्रक्रिया में भी बदलाव

राज्य सरकार ने ऊंचे अपार्टमेंट और बहुमंजिला भवनों के निर्माण के लिए फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) स्वीकृति प्रक्रिया में भी महत्वपूर्ण बदलाव किया है।

नई व्यवस्था के तहत विकास प्राधिकरणों में उपाध्यक्ष तथा आवास विकास परिषद में आवास आयुक्त की अध्यक्षता में समितियां गठित की गई हैं। अब यही समितियां क्रय योग्य एफएआर और प्रीमियम एफएआर से जुड़े प्रस्तावों पर संस्तुति देंगी। पहले यह अधिकार विकास प्राधिकरणों और आवास विकास परिषद के बोर्ड के पास था।

स्थलीय निरीक्षण के बाद ही मिलेगी संस्तुति

नई व्यवस्था के अनुसार समिति आवश्यक समझे जाने पर स्थल निरीक्षण भी कर सकेगी। इसके बाद ही एफएआर की संस्तुति दी जाएगी। समिति प्रस्तावित भवन निर्माण के लिए निर्धारित मानकों का परीक्षण करेगी।

इस दौरान सेटबैक, संरचनात्मक सुरक्षा, अग्निशमन सुरक्षा व्यवस्था, पार्किंग सुविधाएं और आधारभूत ढांचे से जुड़े मानकों की जांच की जाएगी। सभी आवश्यक मानकों के अनुरूप पाए जाने पर ही एफएआर की मंजूरी की सिफारिश की जाएगी।

 

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