अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव कम होने के बजाय और अधिक गहराता दिखाई दे रहा है। युद्धविराम लागू होने के बावजूद दोनों देशों के बीच स्थायी शांति को लेकर अब तक कोई सहमति नहीं बन पाई है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान द्वारा भेजे गए प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज करते हुए बेहद कड़ा बयान दिया है।
ट्रंप ने कहा कि ईरान पिछले लगभग 50 वर्षों से अमेरिका के साथ “खेल” खेलता रहा है, लेकिन अब ऐसा नहीं चलेगा। उनके इस बयान के बाद एक बार फिर मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने की आशंका तेज हो गई है।
ईरान के प्रस्ताव को बताया ‘पूरी तरह अस्वीकार्य’
जानकारी के मुताबिक रविवार को डोनाल्ड ट्रंप को ईरान की ओर से भेजा गया प्रस्ताव मिला था। माना जा रहा था कि यह प्रस्ताव 28 फरवरी से जारी संघर्ष को खत्म करने की दिशा में कोई रास्ता निकाल सकता है, लेकिन ट्रंप ने इसे सिरे से खारिज कर दिया।
उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा, “मैंने अभी ईरान के तथाकथित प्रतिनिधियों का जवाब पढ़ा है। मुझे यह बिल्कुल पसंद नहीं आया। यह पूरी तरह अस्वीकार्य है। वे करीब 50 वर्षों से अमेरिका के साथ खेल खेल रहे हैं, लेकिन अब वे और नहीं हंस पाएंगे।”
हालांकि ट्रंप ने प्रस्ताव की विस्तृत जानकारी साझा नहीं की, लेकिन उन्होंने साफ संकेत दिए कि अमेरिका ईरान के मौजूदा रुख से संतुष्ट नहीं है।
‘मुझे उनका पत्र पसंद नहीं आया’
मीडिया आउटलेट ‘एक्सियोस’ से बातचीत में भी ट्रंप ने ईरान के प्रस्ताव पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, “मुझे उनका पत्र पसंद नहीं आया। यह अनुचित है। उनकी प्रतिक्रिया भी मुझे पसंद नहीं आई।”
ट्रंप ने यह भी बताया कि इस पूरे मुद्दे पर उनकी इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से लंबी बातचीत हुई है। माना जा रहा है कि अमेरिका और इजरायल दोनों ईरान को लेकर आगे की रणनीति पर लगातार संपर्क में हैं।
रिपब्लिकन नेता ने दी सैन्य कार्रवाई की सलाह
ईरान के खिलाफ ट्रंप के सख्त रुख के बाद रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने भी कड़ा बयान दिया है। उन्होंने अमेरिकी प्रशासन से सैन्य विकल्पों पर विचार करने की अपील की है।
ग्राहम ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर हमलों और अमेरिकी सहयोगियों को निशाना बनाए जाने के बाद अब “रास्ता बदलने” का समय आ गया है। उन्होंने संकेत दिए कि अमेरिका ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम प्लस’ के तहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नौसैनिक अभियान को फिर से सक्रिय कर सकता है।
तेल आपूर्ति पर गहरा असर
28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ा है। युद्ध के कारण तेल आपूर्ति से जुड़े अहम समुद्री मार्ग प्रभावित हुए, जिससे कई देशों में ईंधन संकट गहरा गया।
हालांकि 8 अप्रैल से युद्धविराम लागू है, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सकी है। ऐसे में विशेषज्ञ मान रहे हैं कि आने वाले दिनों में हालात और अधिक तनावपूर्ण हो सकते हैं।
