उत्तर प्रदेश के मऊ जिले की घोसी तहसील से एक ऐसी शादी सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में चर्चा छेड़ दी है। नगर क्षेत्र के मझवारा मोड़ स्थित प्रसिद्ध नरोखर पोखरा के शिव मंदिर में 70 वर्षीय लालचंद ने 30 वर्षीय रीमा देवी के साथ हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार सात फेरे लिए। इस विवाह की सबसे खास बात यह रही कि इसमें गांव के लोगों ने ही परिवार की भूमिका निभाई। कोई बाहरी मेहमान नहीं बुलाया गया, बल्कि ग्रामीण ही अगुआ, घराती और बाराती बने।
अकेलेपन और संघर्ष ने दोनों को एक-दूसरे का सहारा बनाया
कल्याणपुर निवासी लालचंद पिछले एक वर्ष से अकेलेपन से जूझ रहे थे। वर्ष 2023 में लंबी बीमारी के बाद उनकी पत्नी का निधन हो गया था। उम्र के इस पड़ाव पर परिवार और संतानें अपने जीवन में व्यस्त हो गईं, जिसके बाद उनका जीवन बेहद कठिन हो गया। ऐसे में उन्हें एक ऐसे साथी की जरूरत महसूस हुई, जो उनके जीवन के शेष सफर में सहारा बन सके।
वहीं, आजमगढ़ जिले के नूरुद्दीनपुर की रहने वाली रीमा देवी की जिंदगी भी संघर्षों से भरी रही। कुछ वर्ष पहले बीमारी के कारण उनके पति की मौत हो गई थी। पति के निधन के बाद दो छोटे बच्चों की जिम्मेदारी पूरी तरह उनके कंधों पर आ गई। आर्थिक तंगी और सामाजिक दबाव के बीच रीमा लगातार अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित रहती थीं।
ग्रामीणों ने दिखाई पहल, बातचीत से बनी सहमति
जब गांव के लोगों और संभ्रांत नागरिकों को दोनों की परिस्थितियों की जानकारी हुई, तो उन्होंने सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए पहल की। ग्रामीणों ने महसूस किया कि यह रिश्ता दोनों परिवारों के लिए नई उम्मीद बन सकता है। एक तरफ लालचंद को बुढ़ापे का सहारा मिल सकता था, तो दूसरी ओर रीमा और उनके बच्चों को सुरक्षित भविष्य और परिवार का साथ मिल सकता था।
इसके बाद ग्रामीणों ने दोनों पक्षों से बातचीत की। चर्चा के दौरान लालचंद ने न सिर्फ रीमा को अपनाने की सहमति दी, बल्कि उनके दोनों बच्चों की जिम्मेदारी उठाने का भी भरोसा दिया। इसके बाद परिवार और ग्रामीणों की सहमति से शादी का निर्णय लिया गया।
शिव मंदिर में सादगी के साथ संपन्न हुआ विवाह
दोनों की सहमति के बाद नरोखर पोखरा स्थित भगवान शिव मंदिर में बेहद सादगीपूर्ण माहौल में विवाह समारोह आयोजित किया गया। गांव के लोगों ने मिलकर शादी की सभी रस्में पूरी कराईं। मंदिर परिसर में मौजूद लोगों की मौजूदगी में लालचंद ने रीमा की मांग में सिंदूर भरकर जीवनभर साथ निभाने का संकल्प लिया।
इस अनोखी शादी को देखने के लिए मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सिर्फ दो लोगों का विवाह नहीं, बल्कि दो संघर्षपूर्ण जिंदगियों का सहारा बनने की मिसाल है। ग्रामीणों ने इसे सामाजिक संवेदनशीलता और सकारात्मक सोच का उदाहरण बताया।
