लोकसभा में 2-तिहाई बहुमत के कितने करीब NDA? परिसीमन विधेयक के लिए फिर बुलाया जा सकता है संसद सत्र

नई दिल्ली: संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो चुका है, लेकिन अभी तक इसे औपचारिक रूप से समाप्त नहीं किया गया है। इसी बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के बयान से एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। उन्होंने संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर मौजूदा सत्र की बैठक दोबारा बुलाई जा सकती है। ऐसे में चर्चा तेज है कि क्या सरकार परिसीमन विधेयक को सदन में लाने की तैयारी कर रही है और क्या उसके पास इसे पारित कराने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा जुट गया है।

रिजिजू ने एक साक्षात्कार में कहा कि संसद को दोबारा बुलाने का फैसला पूरी तरह सरकार पर निर्भर करता है। उनके मुताबिक सरकार राष्ट्रपति से सत्र बुलाने का अनुरोध करती है और जब तक संसद का सत्र आधिकारिक रूप से समाप्त नहीं हुआ है, तब तक उसी सत्र को दोबारा बुलाया जा सकता है। उनसे जब इस बयान के जरिए संभावनाएं खुली रखने को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि इसके दोनों मतलब निकाले जा सकते हैं।

1952 के बाद कई बार ऐसा हुआ

केंद्रीय मंत्री ने सत्र को औपचारिक रूप से समाप्त किए बिना दोबारा बुलाए जाने के सवाल पर पुराने उदाहरणों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 1952 के बाद कई ऐसे मौके आए हैं, जब संसद को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया गया, लेकिन सत्र औपचारिक रूप से समाप्त नहीं हुआ और बाद में उसी सत्र की बैठक फिर से बुलाई गई। इसी वजह से मौजूदा स्थिति को भी इसी प्रक्रिया से जोड़कर देखा जा रहा है।

विपक्ष की बढ़ी चिंता, परिसीमन विधेयक पर नजर

13 अगस्त को लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई थी। हालांकि सरकार ने अब तक सत्र का औपचारिक समापन नहीं किया है। संसदीय प्रक्रिया के जानकारों के मुताबिक ऐसी स्थिति में सरकार कम समय के नोटिस पर उसी सत्र की बैठक दोबारा बुला सकती है। इसी वजह से विपक्षी खेमे में यह चर्चा तेज है कि सरकार परिसीमन विधेयक समेत लंबित विधेयकों को सदन में लाने के लिए इस विकल्प का इस्तेमाल कर सकती है।

पहले भी दो-तिहाई बहुमत जुटाने में नाकाम रही थी सरकार

इससे पहले सरकार ने 16 से 18 अप्रैल तक संसद का विशेष सत्र बुलाकर परिसीमन विधेयक पारित कराने की कोशिश की थी। संविधान संशोधन से जुड़े प्रावधानों के कारण विधेयक को पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत थी। उस समय सरकार इस आंकड़े तक नहीं पहुंच सकी थी। मतदान में विधेयक के पक्ष में 298 वोट पड़े थे, जबकि 230 सांसदों ने इसके खिलाफ मतदान किया था। इसके बाद लोकसभा में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।

NDA के पास अब कितने सांसद, 360 के आंकड़े से अभी दूर

शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट के सात सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो चुके हैं। इसके बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सांसदों की संख्या 299 बताई जा रही है। वहीं अगर तृणमूल कांग्रेस छोड़कर एनसीपीआई में शामिल हुए सभी 20 सांसद सरकार के समर्थन में आते हैं, तो यह संख्या बढ़कर 319 हो सकती है। हालांकि दो-तिहाई बहुमत के लिए जरूरी 360 वोट के मुकाबले यह आंकड़ा अभी भी कम है।

DMK का साथ मिला तो बदल सकता है पूरा गणित

लोकसभा में बहुमत के इस गणित के बीच द्रमुक की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। खबर के मुताबिक द्रमुक फिलहाल कांग्रेस से नाराज है और उसने इंडिया गठबंधन का साथ छोड़ दिया है। अगर लोकसभा में द्रमुक के 22 सांसद परिसीमन विधेयक पर सरकार के पक्ष में मतदान करते हैं तो राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन दो-तिहाई बहुमत के जरूरी आंकड़े को पार कर सकता है। ऐसे में द्रमुक का रुख इस विधेयक के भविष्य के लिए बेहद अहम हो सकता है।

 

Related posts