नई दिल्ली: पाकिस्तान के साथ करीबी संबंधों के कारण भारत के साथ तनाव का सामना कर चुके अजरबैजान के साथ अब द्विपक्षीय रिश्तों को बेहतर बनाने की कोशिश तेज होती दिख रही है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को अजरबैजान की राजधानी बाकू में राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव और विदेश मंत्री जेयहुन बायरामोव से मुलाकात की। बातचीत में व्यापार, निवेश, ऊर्जा, डिजिटल सेवाओं, पर्यटन और परिवहन संपर्क को बढ़ाने पर जोर दिया गया। आठ साल बाद किसी भारतीय विदेश मंत्री की अजरबैजान यात्रा को दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।
पाकिस्तान के समर्थन वाले बयान से बिगड़े थे रिश्ते
भारत और अजरबैजान के संबंधों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान तल्खी आई थी। इसकी एक प्रमुख वजह अजरबैजान के पाकिस्तान और तुर्किये के साथ करीबी रिश्ते रहे हैं। मई 2025 में पाकिस्तान के साथ चार दिन तक चले संघर्ष के दौरान अजरबैजान के विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान पर हुए सैन्य हमलों की निंदा की थी। इस बयान से भारत में नाराजगी पैदा हुई थी।
अब दोनों देश संबंधों को दोबारा मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। जयशंकर ने राष्ट्रपति अलीयेव से मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं दीं। उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के साझा प्रयासों के प्रति अलीयेव के सकारात्मक रुख की भी सराहना की।
राजनीतिक संवाद और आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर जोर
अजरबैजान के विदेश मंत्री जेयहुन बायरामोव के साथ बैठक को जयशंकर ने उपयोगी बताया। दोनों पक्षों ने राजनीतिक बातचीत को मजबूत करने, प्रतिनिधिमंडलों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने, आर्थिक गतिविधियों का विस्तार करने और दोनों देशों के नागरिकों के बीच संपर्क बढ़ाने पर चर्चा की।
यह यात्रा सितंबर में किर्गिस्तान में हुए शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति अलीयेव की मुलाकात के बाद हुई है। इससे पहले अप्रैल में करीब चार साल के अंतराल के बाद दोनों देशों के विदेश कार्यालयों के बीच द्विपक्षीय परामर्श भी आयोजित हुआ था। इन घटनाक्रमों को संबंधों में सुधार की कोशिशों के हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है।
1000 से ज्यादा भारतीय कंपनियां, फिर भी व्यापार सीमित
भारत और अजरबैजान के बीच आर्थिक सहयोग की संभावनाएं व्यापक हैं। अजरबैजान में 1,000 से अधिक भारतीय कंपनियां मौजूद हैं। इसके अलावा, ओएनजीसी विदेश लिमिटेड ने अजरबैजान के अजेरी-चिराग-गुनाशली तेल एवं गैस क्षेत्रों और उनसे जुड़ी बाकू-त्बिलिसी-जेहान पाइपलाइन में 1.2 अरब डॉलर का निवेश किया है।
इसके बावजूद दोनों देशों के बीच व्यापार का स्तर अपेक्षाकृत सीमित बना हुआ है। वर्ष 2026 की पहली छमाही में द्विपक्षीय व्यापार करीब 600 मिलियन डॉलर रहा। बातचीत के दौरान दोनों देशों ने आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने के तरीकों पर विचार किया।
अजरबैजान के विदेश मंत्री ने ऊर्जा, दवा उद्योग, डिजिटल सेवाओं और खनन जैसे क्षेत्रों में साझेदारी की संभावनाओं पर जोर दिया। इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने से दोनों देशों के कारोबारी संबंधों को विस्तार मिल सकता है।
पर्यटन और सीधी उड़ानों का नेटवर्क बढ़ाने पर चर्चा
भारत और अजरबैजान के बीच हवाई संपर्क और पर्यटन भी बातचीत के प्रमुख मुद्दे रहे। वर्ष 2025 में भारत से 1,66,944 पर्यटक अजरबैजान पहुंचे थे। पर्यटकों की संख्या के लिहाज से भारत उस वर्ष अजरबैजान के लिए चौथा सबसे बड़ा स्रोत देश रहा। इससे आगे रूस, तुर्किये और ईरान थे।
जयशंकर ने कहा कि दोनों देश अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे पर समन्वय बढ़ाने के लिए सहमत हुए हैं। उन्होंने हवाई संपर्क को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके मुताबिक, दोनों देशों के बीच रोजाना उड़ानें संचालित होती हैं, लेकिन संपर्क को और बेहतर बनाने के लिए अतिरिक्त उड़ानों की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है।
ईरान से भारतीयों की वापसी में मदद के लिए जताया आभार
जयशंकर ने पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद ईरान से भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने में मदद करने के लिए अजरबैजान सरकार का आभार जताया। यह मुद्दा दोनों देशों के बीच सहयोग का एक अहम पहलू रहा।
बैठक में अजरबैजान और आर्मेनिया के बीच शांति प्रक्रिया पर भी चर्चा हुई। जयशंकर ने अगस्त 2025 में दोनों देशों के बीच हुए शांति समझौते का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि इससे क्षेत्र में स्थायी शांति का रास्ता खुलेगा।
उन्होंने दोहराया कि भारत विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए किए जाने का समर्थन करता है। दोनों पक्षों ने पश्चिम एशिया, यूरोप और यूरेशिया के घटनाक्रमों पर भी विचार साझा किए। जयशंकर ने कहा कि शांति, प्रगति और समृद्धि को बढ़ावा देना दोनों देशों के साझा हित में है और आतंकवाद, संघर्ष तथा अस्थिरता जैसी चुनौतियां दोनों के लिए चिंता का विषय हैं।
