लखनऊ। विधानसभा चुनाव से पहले योगी सरकार अपने दसवें बजट के जरिए प्रदेशवासियों को साधने की पूरी तैयारी में है। चुनावी वर्ष के बजट में सरकार एक ओर सामाजिक कल्याण योजनाओं पर भारी-भरकम खर्च करने जा रही है, तो दूसरी ओर विकास और अवस्थापना परियोजनाओं को भी बड़े पैमाने पर गति देने का खाका तैयार किया गया है। युवाओं, महिलाओं, बुजुर्गों और कमजोर वर्गों को राहत देने वाली योजनाओं के साथ-साथ सड़क, परिवहन, शिक्षा, पुलिस और शहरी विकास पर खास फोकस रहेगा।
अगले वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लगभग 9 लाख करोड़ रुपये के अनुमानित बजट में सरकार ढाई लाख करोड़ रुपये से अधिक राशि विकास कार्यों के लिए रख सकती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और वित्त मंत्री सुरेश खन्ना के हालिया बयानों से साफ संकेत मिल रहे हैं कि चुनावी साल में सरकार खर्च करने से पीछे नहीं हटेगी। बजट 11 फरवरी को सदन में पेश किया जाएगा, तभी सभी योजनाओं और आवंटनों की आधिकारिक तस्वीर सामने आएगी।
सामाजिक योजनाओं पर रहेगा खास जोर
सूत्रों के अनुसार भाजपा के 2022 विधानसभा चुनाव से पहले जारी लोक कल्याण संकल्प पत्र में किए गए बचे हुए वादों को इस बजट के जरिए पूरा करने की तैयारी है। सरकार वृद्धावस्था, विधवा, निराश्रित महिला और दिव्यांग पेंशन को एक हजार रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये प्रतिमाह करने की घोषणा कर सकती है। 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए सार्वजनिक परिवहन मुफ्त करने का संकल्प भी एजेंडे में है, हालांकि इसकी घोषणा चुनाव के नजदीक की जा सकती है।
मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने का वादा इसी साल पूरा होने की संभावना है। वहीं 1,43,450 शिक्षा मित्रों के मानदेय में बढ़ोतरी का एलान भी बजट में हो सकता है। शिक्षा मित्रों को 2017 से 10 हजार रुपये प्रतिमाह मिल रहे हैं, जिसे बढ़ाकर 17 से 20 हजार रुपये किया जा सकता है। इसके लिए करीब 250 करोड़ रुपये का प्रावधान संभव है।
पुलिस और कानून व्यवस्था पर रिकॉर्ड खर्च की तैयारी
बेहतर कानून व्यवस्था को चुनावी साल में सरकार की प्राथमिकता माना जा रहा है। जीरो टॉलरेंस नीति को और मजबूत करने के लिए पुलिस महकमे को 45 हजार करोड़ रुपये से अधिक का बजट दिया जा सकता है। इसमें साइबर अपराध पर नियंत्रण, पुलिस, पीएसी और फायर सर्विस के लिए नए वाहन, भवन निर्माण और आधुनिक संसाधनों पर खास जोर रहेगा।
सड़क, परिवहन और कनेक्टिविटी को मिलेगा बूस्ट
प्रदेश में रोड नेटवर्क को मजबूत करने के लिए लोक निर्माण विभाग को 42 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा मिलने की संभावना है। राज्य राजमार्ग, बाईपास, ग्रामीण सड़कें, लिंक मार्ग, सेतु और धार्मिक मार्गों के निर्माण को गति दी जाएगी। दुर्घटनाओं पर अंकुश के लिए जीरो फैटेलिटी योजना के तहत 1300 करोड़ रुपये दिए जा सकते हैं।
बसों और बस स्टेशनों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए 100 करोड़, ग्राम पंचायत और प्रत्येक विकास खंड में बस स्टॉप बनाने के लिए 1200 करोड़ रुपये का प्रावधान संभव है। इलेक्ट्रिक और डीजल बसों की खरीद के लिए 2000 करोड़ रुपये और हवाई यात्रा को बढ़ावा देने के लिए जेवर समेत सभी हवाई पट्टियों के विकास पर 2000 करोड़ रुपये खर्च किए जा सकते हैं। अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण को भी 500 करोड़ रुपये मिलने की संभावना है।
शिक्षा और शहरी विकास पर बड़ा फोकस
बेसिक और माध्यमिक शिक्षा के लिए इस बार 2500 करोड़ रुपये अतिरिक्त दिए जा सकते हैं। बेसिक शिक्षा को 81 हजार करोड़ और माध्यमिक शिक्षा को 25 हजार करोड़ रुपये मिलने की संभावना है। शेष बचे 140 विकास खंडों में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के लिए 1000 करोड़ और जर्जर स्कूलों के सुधार के लिए 300 करोड़ रुपये दिए जा सकते हैं। माध्यमिक विद्यालयों में ड्रीम स्किल लैब क्लस्टर के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान हो सकता है।
शहरी अवस्थापना सुविधाओं के लिए आवास विभाग को 8500 करोड़ रुपये मिल सकते हैं। मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना के तहत नई टाउनशिप विकसित करने के लिए 3500 करोड़ रुपये देने की तैयारी है। लखनऊ, कानपुर, मेरठ, मथुरा-वृंदावन समेत विभिन्न विकास प्राधिकरणों के लिए 2500 करोड़, लखनऊ मेट्रो के लिए 500 करोड़ और मंडलीय कार्यालयों के निर्माण के लिए 80 करोड़ रुपये का प्रस्ताव है।
क्षेत्रीय विकास, खेल और उद्योग पर निवेश
त्वरित आर्थिक विकास योजना के तहत नई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए 2000 करोड़ रुपये दिए जा सकते हैं। पूर्वांचल के लिए करीब 1500 करोड़ और बुंदेलखंड के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान संभावित है। खेलों को बढ़ावा देने के लिए 1000 करोड़ रुपये खर्च किए जा सकते हैं।
आगरा, मीरजापुर, देवीपाटन, झांसी, मुरादाबाद, अयोध्या, बरेली और अलीगढ़ में स्पोर्ट्स कॉलेज स्थापित करने के लिए लगभग 20 करोड़ रुपये दिए जा सकते हैं। मेरठ स्थित मेजर ध्यानचंद्र राज्य खेल विश्वविद्यालय में स्पोर्ट्स साइंस लैब, जिम, उपकरण और पुस्तकों के लिए 42 करोड़ रुपये से अधिक का बजट संभव है। ग्रामीण स्टेडियम और ओपन जिम के लिए 350 करोड़ रुपये दिए जा सकते हैं।
पीएम अजय योजना के तहत अनुसूचित जाति बहुल गांवों के विकास के लिए 2000 करोड़ रुपये और औद्योगिक क्षेत्रों की अवस्थापना सुविधाओं को मजबूत करने के लिए अटल इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत 4000 करोड़ रुपये दिए जा सकते हैं।
बजट खर्च न हो पाने पर उठ रहे सवाल
हालांकि भारी-भरकम बजट घोषणाओं के बावजूद खर्च की रफ्तार पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। मौजूदा वित्तीय वर्ष में लोक निर्माण विभाग को 37,798 करोड़ रुपये मिले थे, लेकिन 10 महीनों में केवल 40 प्रतिशत ही खर्च हो सका। पुलिस विभाग ने 61 प्रतिशत, राजस्व 45 प्रतिशत, आवास 37 प्रतिशत, प्राथमिक शिक्षा 53 प्रतिशत, समाज कल्याण 58 प्रतिशत, वन 46 प्रतिशत, परिवहन 34 प्रतिशत, अवस्थापना 21 प्रतिशत और खेल विभाग ने सिर्फ 33 प्रतिशत बजट ही खर्च किया।
पिछले बजट में घोषित रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना, नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर, कुकरैल नाइट सफारी, मंडलीय कार्यालयों का निर्माण, मां अन्नपूर्णा कैंटीन और हर परिवार को रोजगार देने जैसे कई ऐलान अब तक धरातल पर पूरी तरह नहीं उतर सके हैं। ऐसे में चुनावी बजट में किए जाने वाले नए वादों के क्रियान्वयन पर भी निगाहें टिकी रहेंगी।
