नई दिल्ली: कमजोर मानसून का असर इस साल खरीफ फसलों की बुवाई पर साफ दिखाई दे रहा है। कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 10 जुलाई 2026 तक खरीफ फसलों की कुल बुवाई का रकबा 16 प्रतिशत घटकर 531.25 लाख हेक्टेयर रह गया है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 632.69 लाख हेक्टेयर था। विशेषज्ञों के अनुसार मानसून की धीमी रफ्तार और अल-नीनो के प्रभाव के कारण कई राज्यों में बुवाई प्रभावित हुई है।
भारत में खरीफ फसलों की बुवाई सामान्यतः दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन के साथ जून से शुरू होती है। इस वर्ष कमजोर मानसून के चलते कई इलाकों में बुवाई में देरी हुई है। देश की बड़ी आबादी अब भी वर्षा आधारित खेती पर निर्भर है, इसलिए मानसून की स्थिति का सीधा असर कृषि पर पड़ रहा है।
धान की बुवाई में भी आई गिरावट
कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक धान की बुवाई का रकबा 8.63 प्रतिशत घटकर 114.69 लाख हेक्टेयर रह गया है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 125.53 लाख हेक्टेयर था।
दलहन की खेती पर सबसे ज्यादा असर
दलहनों की बुवाई में 23.31 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इस वर्ष 56.63 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में दलहन की बुवाई हुई, जबकि पिछले वर्ष यह 73.85 लाख हेक्टेयर थी।
दलहनों में अरहर का रकबा 28.03 लाख हेक्टेयर से घटकर 19.54 लाख हेक्टेयर रह गया। उड़द की बुवाई 13.29 लाख हेक्टेयर से घटकर 9.34 लाख हेक्टेयर और मूंग का रकबा 24.08 लाख हेक्टेयर से घटकर 21.52 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया।
मोटे अनाज और तिलहन की बुवाई भी घटी
मोटे अनाज की बुवाई में 22.47 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इसका रकबा पिछले वर्ष के 127.30 लाख हेक्टेयर से घटकर 98.69 लाख हेक्टेयर रह गया।
तिलहन की बुवाई भी 21 प्रतिशत घटकर 117.83 लाख हेक्टेयर रह गई। पिछले वर्ष यह 149.18 लाख हेक्टेयर थी। वहीं सोयाबीन का रकबा 107.72 लाख हेक्टेयर से घटकर 90.51 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया।
कपास की खेती में भी कमी
नकदी फसलों में कपास की बुवाई 15.33 प्रतिशत घटकर 79.54 लाख हेक्टेयर रह गई है। पिछले वर्ष इसी अवधि में इसका रकबा 93.95 लाख हेक्टेयर था।
गन्ना और जूट की खेती में बढ़ोतरी
कमजोर मानसून के बीच गन्ना और जूट की खेती में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है। गन्ने का रकबा 56.72 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 57.58 लाख हेक्टेयर हो गया, जबकि जूट एवं मेस्टा की बुवाई 6.16 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 6.28 लाख हेक्टेयर पहुंच गई।
अल-नीनो से प्रभावित हो रहे कई राज्य
जानकारों के अनुसार अल-नीनो का प्रभाव महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और विदर्भ, गुजरात के तटीय क्षेत्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तरी कर्नाटक, पूर्वी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड समेत कई क्षेत्रों में अधिक देखने को मिलता है, जहां मानसून की कमी का सीधा असर खेती पर पड़ रहा है।
