लखनऊ: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी का जोर नए और पात्र मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट में जुड़वाने के साथ बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने पर है। इसके लिए भाजपा ने कॉल सेंटर मॉडल के जरिए कार्यकर्ताओं से सीधा संपर्क साधने की रणनीति बनाई है। लखनऊ में फिलहाल 200 कॉलर्स के साथ इसकी शुरुआत की गई है, जबकि दिसंबर तक इनकी संख्या बढ़ाकर 1,000 करने की तैयारी है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, भाजपा की चुनावी रणनीति में इस समय चुनाव आयोग की ओर से चलाए जा रहे विशेष संक्षिप्त मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान को अहम स्थान दिया गया है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि पात्र मतदाताओं के नाम सूची में शामिल हों और मतदाता सूची से जुड़ी किसी भी गड़बड़ी या भ्रामक जानकारी पर नजर रखी जाए।
बीते 24 अक्टूबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और राज्य कार्यसमिति के सदस्यों के साथ वर्चुअल बैठक की थी। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में जिला और मंडल स्तर के नेताओं को नए और योग्य मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जुड़वाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए गए। नेताओं से यह भी कहा गया कि सूची में किसी तरह की गड़बड़ी पर नजर रखें और अफवाहों या गलत सूचनाओं का तत्काल खंडन करें।
लखनऊ में हाईटेक कॉल सेंटर, दिसंबर तक 1,000 कॉलर्स का लक्ष्य
भाजपा ने अपनी चुनावी रणनीति को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए लखनऊ में हाईटेक कॉल सेंटर स्थापित किए हैं। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और उत्तर प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े के मार्गदर्शन में चल रही इस पहल का प्रबंधन प्रदेश महामंत्री और पूर्व आईटी सेल प्रमुख संजय राय कर रहे हैं।
फिलहाल 200 कॉलर्स के साथ काम शुरू किया गया है। ये कॉलर्स जमीनी कार्यकर्ताओं से संपर्क कर उन्हें पार्टी के कार्यक्रमों और वरिष्ठ नेताओं के दौरों की जानकारी दे रहे हैं। इसके साथ ही संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच संवाद को मजबूत बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, 15 नवंबर तक टेलीकॉलर्स की संख्या में बढ़ोतरी की जाएगी। इसके बाद दिसंबर तक राज्य के अलग-अलग हिस्सों में नए कॉल सेंटर खोलने की योजना है। पार्टी का लक्ष्य इस नेटवर्क में कॉलर्स की कुल संख्या 1,000 तक पहुंचाना है।
क्या है भाजपा का कॉल सेंटर मॉडल?
भाजपा चुनावी राज्यों में मतदाताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं से संपर्क बनाए रखने के लिए कॉल सेंटरों का इस्तेमाल करती है। इस व्यवस्था के तहत टेलीकॉलर्स कार्यकर्ताओं को संगठन के कार्यक्रमों, चुनावी गतिविधियों और नेतृत्व से जुड़ी जानकारियां पहुंचाते हैं।
कॉल सेंटरों के जरिए विभिन्न क्षेत्रों से फीडबैक भी जुटाया जाता है। जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं से मिलने वाली जानकारी को एकत्र कर पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व तक पहुंचाया जाता है। इस तरह कॉल सेंटर संगठन और नेतृत्व के बीच संवाद की कड़ी के रूप में काम करते हैं।
वोटर लिस्ट पर नजर, संगठन को सक्रिय करने की कोशिश
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण की तैयारियों के बीच चुनाव अधिकारियों को भी सूची में गड़बड़ी और लापरवाही के मामलों में सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। ऐसे माहौल में भाजपा नए पात्र मतदाताओं को जोड़ने और मतदाता सूची से संबंधित गतिविधियों पर निगरानी रखने पर जोर दे रही है।
पार्टी की रणनीति में कॉल सेंटरों के जरिए कार्यकर्ताओं तक सूचनाएं पहुंचाना, अलग-अलग क्षेत्रों से फीडबैक लेना और संगठनात्मक गतिविधियों में तालमेल बढ़ाना शामिल है। हालांकि, आगामी विधानसभा चुनाव की तारीखों को लेकर अंतिम स्थिति आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।
