सुप्रीम कोर्ट में आज SIR पर सुनवाई, राहुल गांधी समेत 13 विपक्षी नेताओं की याचिका पर टिकी नजरें

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई होनी है। इनमें मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवाल भी शामिल हैं। राहुल गांधी समेत विपक्ष के कई नेताओं ने इन मुद्दों पर याचिकाएं दाखिल की हैं। सुनवाई से पहले चुनाव आयोग ने भी अदालत में हलफनामा दाखिल कर याचिकाकर्ताओं के आरोपों पर अपना पक्ष रखा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित याचिकाओं को एक साथ सुनने का फैसला किया है। अदालत में स्वीकार की गई याचिकाओं में कुल 11 याचिकाकर्ता बताए गए हैं। मामले में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के अलावा चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को भी प्रतिवादी बनाया गया है।

राहुल गांधी समेत इन विपक्षी नेताओं ने दाखिल की याचिका

SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े मुद्दों को लेकर याचिका दाखिल करने वाले नेताओं में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे शामिल हैं। इनके अलावा तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी यादव, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के संजय राउत और अन्य विपक्षी नेता भी याचिकाकर्ताओं में शामिल बताए गए हैं।

सूची में एमए बेबी, डी. राजा, महुआ माझी, सुप्रिया सुले और ईटी मोहम्मद बशीर के नाम भी हैं। याचिकाओं में चुनावी प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज को लेकर सवाल उठाए गए हैं। अब सुनवाई के दौरान अदालत के सामने याचिकाकर्ताओं और चुनाव आयोग के तर्क रखे जाने की उम्मीद है।

सुनवाई से पहले चुनाव आयोग ने दाखिल किया हलफनामा

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले चुनाव आयोग ने अपना पक्ष रखते हुए हलफनामा दाखिल किया है। आयोग ने याचिकाकर्ताओं की ओर से SIR से जुड़े फैसलों पर उठाए गए सवालों को चुनौती दी है। हलफनामे में कहा गया है कि याचिकाओं में लगाए गए आरोप समाचार पत्रों की रिपोर्ट पर आधारित हैं और आयोग के मुताबिक वे तथ्यों से मेल नहीं खाते।

आयोग ने अदालत को अपने निर्णय लेने की प्रक्रिया और मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े नियमों के बारे में भी जानकारी दी है। इस जवाब के बाद मामले में चुनाव आयोग और विपक्षी नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का मुद्दा और महत्वपूर्ण हो गया है।

तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से फैसले लेने का दावा

चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे में कहा है कि संबंधित निर्णय तीनों चुनाव आयुक्तों ने मिलकर लिए थे और कोई फैसला एकतरफा नहीं किया गया। आयोग के अनुसार, किसी मतदाता का नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया में निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) की भूमिका महत्वपूर्ण है।

हलफनामे में यह भी कहा गया है कि फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है। फॉर्म-6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए किया जाता है।

अनमैप्ड मतदाताओं और दस्तावेजों पर आयोग का पक्ष

चुनाव आयोग के अनुसार, जिन मतदाताओं का रिकॉर्ड पुराने मतदाता डेटा से मैप नहीं हो पाया है, उन्हें सुनवाई के लिए बुलाना हर मामले में जरूरी नहीं है। आयोग ने कहा है कि बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर जाकर दस्तावेज जुटाएंगे।

SIR की प्रक्रिया, दस्तावेजों की जांच और मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने के नियमों को लेकर विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाए हैं। वहीं, चुनाव आयोग ने हलफनामे में अपनी प्रक्रिया का बचाव किया है। अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलों और अदालत की टिप्पणियों पर नजर रहेगी।

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