नई दिल्ली: स्वतंत्रता संग्राम के प्रखर सेनानी और राष्ट्रवादी विचारक विनायक दामोदर सावरकर की 143वीं जयंती पर बुधवार को देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों और नेताओं ने वीर सावरकर के राष्ट्रप्रेम, त्याग, साहस और सामाजिक योगदान को याद किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीर सावरकर को नमन करते हुए कहा कि उनका साहस, देशभक्ति और राष्ट्रसेवा का भाव आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा। पीएम मोदी ने कहा कि सावरकर की बुद्धिमत्ता और सामाजिक सुधारों के लिए किया गया कार्य भारतीय समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है।
अमित शाह ने कहा- मातृभूमि के लिए समर्पित रहा पूरा जीवन
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट साझा करते हुए वीर सावरकर को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने लिखा कि स्वतंत्रता संग्राम के निर्भीक योद्धा वीर सावरकर ने अपना संपूर्ण जीवन मातृभूमि की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। अमित शाह ने कहा कि सावरकर के जीवन, विचारों और लेखनी से राष्ट्र के प्रति अटूट निष्ठा की प्रेरणा मिलती है।
उन्होंने सावरकर के शब्दों का उल्लेख करते हुए कहा, “हे मातृभूमि! जन्म से लेकर मृत्यु तक, मैं तुम्हारा ही हूँ।” शाह ने कहा कि यह पंक्तियां उनके राष्ट्रप्रेम की गहराई को दर्शाती हैं। उन्होंने सावरकर द्वारा अस्पृश्यता जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ किए गए प्रयासों और समाज को एकजुट करने की उनकी सोच को भी याद किया।
राजनाथ सिंह बोले- यातनाएं झेलकर भी नहीं डिगा संकल्प
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वीर सावरकर को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वह केवल महान स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि ओजस्वी वक्ता, कवि और दार्शनिक भी थे। उन्होंने कहा कि सावरकर ने कठिन यातनाएं सहते हुए भी भारत की स्वतंत्रता के लिए अपना सब कुछ समर्पित कर दिया।
कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने दी श्रद्धांजलि
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने वीर सावरकर को अखंड राष्ट्रनिष्ठा, अदम्य साहस और त्याग का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए उनका संघर्ष और तेजस्वी चिंतन सदैव प्रेरणा देता रहेगा।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने वीर सावरकर को प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक बताते हुए कहा कि उनके नाम का स्मरण मात्र राष्ट्रभक्ति और आत्मगौरव की भावना को जागृत कर देता है। उन्होंने कहा कि तमाम असहनीय यातनाओं के बावजूद सावरकर ने स्वतंत्रता की लौ को कभी बुझने नहीं दिया।
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि वीर सावरकर का त्याग, संघर्ष और राष्ट्रहित के प्रति समर्पण देशवासियों को सदैव राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भी उन्हें स्वतंत्रता आंदोलन का अग्रिम सेनानी बताते हुए कहा कि कालापानी की कठोर सजा भी उनके इरादों को कमजोर नहीं कर सकी।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वीर सावरकर का राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत जीवन और उनके विचार हमेशा देशसेवा की प्रेरणा देते रहेंगे। वहीं हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि अंग्रेजों की कठोर यातनाएं भी सावरकर के स्वतंत्र भारत के संकल्प को तोड़ नहीं सकीं।
उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने वीर सावरकर की लेखनी को क्रांति की ज्वाला बताते हुए कहा कि उनके विचारों में राष्ट्र और हिंदुत्व के स्वाभिमान की स्पष्ट चेतना दिखाई देती थी।
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि वीर सावरकर का जीवन कठिन और असाधारण संघर्षों से भरा रहा, लेकिन उन्होंने औपनिवेशिक क्रूरता के सामने कभी अपने विचारों से समझौता नहीं किया।
रेखा गुप्ता और फडणवीस ने भी किया नमन
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने वीर सावरकर को प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक बताते हुए कहा कि उनका पूरा जीवन ‘राष्ट्र प्रथम’ के संकल्प और अखंड भारत की चेतना को समर्पित रहा। वहीं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उन्हें महान देशभक्त, कवि और समाज सुधारक बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
1883 में हुआ था जन्म, 1966 में हुआ निधन
विनायक दामोदर सावरकर का जन्म 28 मई 1883 को हुआ था। वे भारतीय राजनीतिज्ञ, स्वतंत्रता सेनानी और विचारक के रूप में जाने जाते हैं। वर्ष 1922 में रत्नागिरी जेल में कैद के दौरान उन्होंने हिंदुत्व की राजनीतिक विचारधारा को विकसित किया था। वीर सावरकर हिंदू महासभा के प्रमुख नेताओं और विचारकों में शामिल रहे। 26 फरवरी 1966 को 82 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।
