श्रीधर अग्निहोत्रीलखनऊ। नाना पाटेकर का नाम आते ही एक चेहरा सामने आता जो कठोर, गंभीर और भीतर तक उतर जाने वाली आंखों वाला। एक ऐसी आवाज, जिसमें गुस्सा भी दिखता था, दर्द भी और सच कहने का साहस भी। हिंदी सिनेमा में बहुत कम कलाकार ऐसे हुए हैं, जिनकी मौजूदगी पर्दे पर आते ही कहानी का तापमान बदल देती है। नाना पाटेकर उन्हीं में से एक थे। मराठी रंगमंच से शुरू हुआ उनका सफर धीरे-धीरे हिंदी फिल्मों तक पहुंचा। अंकुश, प्रतिघात, परिंदा, क्रांतिवीर, अग्निसाक्षी, यशवंत और अब तक छप्पन जैसी…
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