भारतीय रेलवे देशभर में रेल नेटवर्क की तस्वीर बदलने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाने जा रहा है। यात्रियों की बढ़ती भीड़, माल ढुलाई की मांग और सुरक्षा जरूरतों को देखते हुए रेलवे ने कई प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं का मकसद लाइनों की क्षमता बढ़ाना, ट्रैफिक जाम खत्म करना, ट्रेन संचालन को ज्यादा सुरक्षित बनाना और यात्री व माल परिवहन को तेज और भरोसेमंद करना है। ये मंजूरियां दक्षिणी रेलवे, उत्तरी रेलवे और दक्षिण पूर्वी रेलवे से जुड़े अहम रूट्स के लिए दी गई हैं, जिनमें लाइन डबलिंग, तीसरी-चौथी लाइन, बाईपास कॉरिडोर और अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम शामिल हैं।
झारखंड में क्षमता विस्तार को बड़ी राहत
दक्षिण पूर्वी रेलवे के तहत झारखंड में बरबेंडा-दामरुघुटू लाइन की डबलिंग और दामरुघुटू से बोकारो स्टील सिटी के बीच तीसरी और चौथी लाइन को मंजूरी दी गई है। इस बड़े क्षमता विस्तार प्रोजेक्ट पर 815.32 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह सेक्शन भारत के ऊर्जा, खनिज और सीमेंट कॉरिडोर की एक अहम कड़ी माना जाता है। मौजूदा समय में यह लाइन 108 फीसदी क्षमता पर चल रही है, जहां ट्रेनों को 90 से 150 मिनट तक रोके जाने की स्थिति बनती है। रोजाना 78 ट्रेनें, जिनमें 38 यात्री और 40 मालगाड़ियां शामिल हैं, इसी सेक्शन से गुजरती हैं और 35.22 मिलियन टन प्रतिवर्ष माल ढुलाई होती है। अगर यह विस्तार नहीं होता, तो 2028-29 तक उपयोग 132 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान था। इस प्रोजेक्ट से सेंट्रल कोलफील्ड्स, सीमेंट और स्टील प्लांट, HPCL और BPCL डिपो समेत बोकारो स्टील सिटी के औद्योगिक नेटवर्क को बड़ी मजबूती मिलेगी और राष्ट्रीय सप्लाई चेन ज्यादा कुशल बनेगी।
हाई-डेंसिटी रूट पर सुरक्षा को मिलेगी मजबूती
रेलवे ने उत्तरी रेलवे के हाई-डेंसिटी और हाईली यूटिलाइज्ड नेटवर्क रूट्स पर 34 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम लगाने को भी मंजूरी दी है। यह काम उन स्टेशनों पर किया जाएगा, जहां पहले से कवच ट्रेन सुरक्षा प्रणाली लागू की जा रही है। दिल्ली डिवीजन के 21 स्टेशनों पर 292.24 करोड़ रुपये और अंबाला डिवीजन के 13 स्टेशनों पर 129.17 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस अपग्रेड से सिग्नलिंग सिस्टम ज्यादा भरोसेमंद होगा, ट्रेन संचालन सुरक्षित बनेगा और व्यस्त रूट्स पर ज्यादा ट्रेनों के संचालन की गुंजाइश पैदा होगी।
राजपुरा बाईपास से मालगाड़ियों को मिलेगी सीधी राह
नॉर्दर्न रेलवे के अंबाला-जालंधर सेक्शन पर 13.46 किलोमीटर लंबी राजपुरा बाईपास लाइन को मंजूरी दी गई है, जिस पर 411.96 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह बाईपास न्यू शंभू डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर स्टेशन को राजपुरा-बठिंडा लाइन के कौली स्टेशन से सीधे जोड़ेगा। इसके बाद मालगाड़ियों को भीड़भाड़ वाले राजपुरा यार्ड से नहीं गुजरना पड़ेगा। इससे मौजूदा लाइनों पर दबाव कम होगा, माल ढुलाई तेज होगी और यात्री व फ्रेट ट्रैफिक की बढ़ती मांग को बेहतर तरीके से संभाला जा सकेगा।
केरल में सिंगल-लाइन बाधा होगी खत्म
दक्षिणी रेलवे के अलाप्पुझा-अंबालापुझा सेक्शन पर लाइन डबलिंग को रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। 12.66 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट पर 324.16 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके पूरा होने के बाद एर्नाकुलम-तुरवूर-कायमकुलम रूट पर सिंगल-लाइन की बड़ी बाधा खत्म हो जाएगी। इससे हर दिशा में रोजाना 9 अतिरिक्त यात्री ट्रेनें चल सकेंगी, सालाना 2.88 मिलियन टन माल ढुलाई क्षमता बढ़ेगी और रेलवे की कमाई में 3.23 करोड़ रुपये प्रति वर्ष का इजाफा होगा।
पलक्कड़ बाईपास से समय की बचत
केरल में पलक्कड़ टाउन-पार्ली के बीच 1.80 किलोमीटर लंबी बाईपास लाइन को भी मंजूरी दी गई है, जिस पर 163.57 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इस प्रोजेक्ट से पलक्कड़ जंक्शन पर इंजन रिवर्सल की जरूरत खत्म होगी। इससे यात्री ट्रेनों की औसत देरी 40 से 44 मिनट तक कम होगी, जबकि मालगाड़ियों की देरी में 120 मिनट तक की कमी आएगी। यह बाईपास शोरानूर, तिरुवनंतपुरम और पोलाची रूट पर समय की पाबंदी को बेहतर बनाएगा और दक्षिणी रेलवे के सबसे व्यस्त जंक्शनों में से एक पर भीड़ घटाएगा।
तमिलनाडु में इरुगुर-पोडानूर डबलिंग को मंजूरी
चेन्नई-तिरुवनंतपुरम कॉरिडोर के अहम लिंक इरुगुर-पोडानूर सेक्शन की 10.77 किलोमीटर लंबी डबलिंग परियोजना को हरी झंडी मिल गई है। इस पर 277.42 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके बाद रोजाना 15 अतिरिक्त यात्री ट्रेनें चलाई जा सकेंगी और माल ढुलाई क्षमता में सालाना 3.12 मिलियन टन का इजाफा होगा। रेलवे को इससे हर साल 11.77 करोड़ रुपये की अतिरिक्त शुद्ध कमाई होने की उम्मीद है।
