लेबनान में जर्जर इमारत बनी मौत का मंजर, ढहने से 5 लोगों की गई जान; मलबे में अब भी फंसे लोगों की तलाश जारी

नई दिल्ली। लेबनान के उत्तरी शहर त्रिपोली में एक बार फिर जर्जर इमारतें जानलेवा साबित हुई हैं। रविवार को बाब अल-तब्बानेह इलाके में एक पुरानी रिहायशी इमारत अचानक भरभराकर गिर गई, जिसमें अब तक पांच लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई, जबकि राहत और बचाव दल मलबे में दबे अन्य लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं। यह घटना एक हफ्ते के भीतर इसी तरह का दूसरा बड़ा हादसा बताया जा रहा है।

गरीब इलाके में ढही इमारत, मची अफरा-तफरी
सरकारी नेशनल न्यूज एजेंसी के मुताबिक, त्रिपोली के बाब अल-तब्बानेह क्षेत्र में यह हादसा हुआ, जिसे शहर का सबसे गरीब इलाका माना जाता है। अचानक इमारत गिरने से उसमें रह रहे लोग मलबे की चपेट में आ गए। सुरक्षा एजेंसियों ने एहतियातन आसपास की इमारतों को भी खाली करा लिया है, क्योंकि अन्य ढांचों के भी गिरने का खतरा बना हुआ है।

अब तक 5 मौतें, 8 लोगों को बचाया गया
राहत कार्यों के दौरान अब तक आठ लोगों को मलबे से जीवित निकाला गया है, जबकि पांच शव बरामद किए जा चुके हैं। मृतकों में एक बच्चा और एक बुजुर्ग महिला भी शामिल हैं। सिविल डिफेंस प्रमुख इमाद ख्रीश ने स्थानीय मीडिया को बताया कि इमारत दो ब्लॉकों में बनी थी और प्रत्येक ब्लॉक में छह-छह अपार्टमेंट थे।

राष्ट्रपति कार्यालय ने दिए राहत के निर्देश
लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन के कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इमरजेंसी सेवाओं को रेस्क्यू ऑपरेशन में हरसंभव मदद करने और हादसे में प्रभावित लोगों के साथ-साथ एहतियातन खाली कराई गई पड़ोसी इमारतों के निवासियों के लिए अस्थायी आश्रय की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

लेबनान में जर्जर इमारतें बना रही हैं जान का खतरा
लेबनान में पुरानी और खस्ताहाल इमारतों की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। कई इमारतें अवैध रूप से बनाई गई थीं, खासकर 1975 से 1990 के गृह युद्ध के दौरान। वहीं कई मामलों में बिना अनुमति के इमारतों पर अतिरिक्त मंजिलें जोड़ दी गईं, जिससे ढांचागत मजबूती कमजोर हो गई।

आर्थिक संकट ने हालात और बिगाड़े
साल 2024 में एमनेस्टी इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि तुर्की और पड़ोसी सीरिया में आए भूकंप के एक साल से ज्यादा समय बाद भी त्रिपोली में हजारों लोग असुरक्षित इमारतों में रहने को मजबूर हैं। रिपोर्ट में कहा गया था कि लेबनान में लंबे समय से जारी आर्थिक संकट ने लोगों की मरम्मत कराने या सुरक्षित वैकल्पिक आवास ढूंढने की क्षमता भी छीन ली है, जिससे ऐसे हादसों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।


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