मुम्बई। वसई के वालिव इलाके में एक 14 वर्षीय छात्रा की मौत के मामले ने स्कूलों में मिलने वाली शारीरिक सज़ा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला 8 नवंबर का है, जब स्कूल में देर से पहुंचने पर लगभग 50 छात्रों को कथित रूप से 100 उठक-बैठक की सज़ा दी गई। इन्हीं छात्रों में मृतक छात्रा भी शामिल थी।
वालिव पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक दिलीप घुगे ने मीडिया को बताया, “लड़की के माता-पिता ने कहा कि 8 नवंबर को वह देर से पहुंची थी और टीचर ने उसे और अन्य छात्रों को 100 उठक-बैठक करने को कहा था। घर पहुंचने पर उसके पैरों में तेज़ दर्द था। पहले उसे पास के अस्पताल ले जाया गया और फिर 10 नवंबर को जे.जे. अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
” परिजनों ने आरोप लगाया है कि सज़ा के कारण ही उनकी बेटी की तबीयत बिगड़ी और उसी की वजह से उसकी मौत हुई। फिलहाल पुलिस ने इस मामले में एडीआर (एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट) दर्ज की है।पुलिस ने बताया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतज़ार किया जा रहा है। प्राथमिक मेडिकल रिपोर्ट में यह सामने आया है कि छात्रा का हिमोग्लोबिन स्तर मात्र चार था, जिसे बेहद खतरनाक रूप से कम माना जाता है। इससे स्वास्थ्य संबंधी गंभीर जटिलताओं की आशंका बढ़ जाती है।
पुलिस ने कहा कि मामले की जांच जारी है और स्कूल प्रशासन से भी पूछताछ की जा रही है। परिजन न्याय की मांग कर रहे हैं, जबकि यह घटना स्कूलों में शारीरिक सज़ा की प्रथा पर एक बार फिर बहस छेड़ रही है।
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