नई दिल्ली। सबसे जहरीले जीवों में शामिल सांप की दुनियाभर में तीन हजार से ज्यादा प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें कुछ सांप बेहद जहरीले होते हैं, जिनके काटने से इंसान की पलभर में मौत हो सकती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में सांपों की 69 प्रजातियां ऐसी हैं, जो बेहद खतरनाक होती हैं। इनमें 29 समुद्री सांप हैं, तो वहीं 40 जमीन पर रहने वाले हैं। किंग कोबरा, करैत और ब्लैक माम्बा समेत कई सांप बेहद जहरीले माने जाते हैं। सांप गर्मी और बारिश के मौसम में सबसे ज्यादा दिखाई देते हैं, लेकिन ठंड के मौसम में ये बहुत कम दिखाई देते हैं। ऐसे लोगों के मन में सवाल खड़ा होता है कि आखिर सांप ठंड में क्या करते हैं और कहां चले जाते हैं ?
वैज्ञानिकों के मुताबिक, सांपों की नींद का समय वातावरण के तापमान और उनके भोजन की उपलब्धता पर निर्भर होती है । भयानक ठंड के मौसम में अधिकतर सांप सोते हैं । सांप का खून ठंडा होता है, ऐसे में उनका शरीर तापमान खुद नियंत्रित नहीं कर सकता है। इसलिए ठंड में उनका शरीर सुस्त पड़ जाता है और वो ज्यादा ऊर्जा खर्च नहीं करते। इस दौरान वो खुद को बचाने के लिए सुरक्षित जगह जैसे बिल, पत्थरों के नीचे या पेड़ों की जड़ों में छिप जाते हैं। ठंड के दिनों में सांप कई हफ्तों या महीनों तक सोते रहते हैं।
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इसे हाइबरनेशन (शीत निद्रा) कहा जाता है। गर्मी या बारिश में तापमान अनुकूल होने पर सांप ज्यादा सक्रिय रहते हैं। वो दिन में कम और रात में ज्यादा समय तक घूमते हैं, क्योंकि उन्हें ठंडा वातावरण पसंद होता है। अक्सर लोग कहते हैं कि सांप सोते नहीं है। इसकी वजह यह है कि उनकी आंखें हमेशा खुली रहती हैं। हालांकि, सच्चाई यह है कि सांपों की पलके नहीं होतीं और उनकी आंखों पर एक पारदर्शी परत होती है, जो उन्हें धूल और चोट से बचाने का काम करती है । इसलिए सांप सोते हैं, तो उनकी आंखें खुली दिखाई देती है। वैज्ञानिकों को शोध में पता चला है कि सांपों की नींद के भी पैटर्न होते हैं।
सोते समय सांप की सांस धीमी पड़ जाती है और शरीर स्थिर हो जाता है। वो किसी भी आवाज या हलचल पर तुरंत प्रतिक्रिया नहीं देते हैं। मौसम के हिसाब से सांपों की नींद के समय में बदलाव होता है। गर्मी के दिनों में तापमान अधिक होने की वजह से सांप दिन में धूप से बचने के लिए बिलों में रहते हैं और रात में बाहर आते हैं। इस समय वो 10 से 12 घंटे तक आराम करते हैं। बारिश में नमी और ठंडक की वजह से दिन में थोड़ी देर आराम करते हैं, तो वहीं रात में अधिक सक्रिय रहते हैं। सर्दी के मौसम में तापमान ज्यादा नीचे जाने पर सांप पूरी तरह निष्क्रिय हो जाते हैं।
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इस दौरान वो दो से तीन महीने या इससे भी अधिक समय तक बिना खाए-पिए सोए रहते हैं । यही समय उनकी असली नींद का समय होता है। ठंड के मौसम में सांप किसी गहरी दरार, पुराने बिल या जमीन के भीतर गर्म जगहों पर चले जाते हैं। इस दौरान उनका पाचन तंत्र और दिल की धड़कन धीमी हो जाती है। कई बार एक ही जगह पर कई सांप एक साथ सोते हैं, जिससे उन्हें गर्मी मिल पाए। मौसम बदलने और तापमान बढ़ने पर, वो फिर से बाहर आ जाते हैं और सक्रिय हो जाते हैं।
सांपों की नींद औसत 12 से 16 घंटे की होती है, लेकिन सर्दियों में यह महीनों तक बढ़कर हो जाती है। कुछ सांप की रेगिस्तानी प्रजातियां गर्मियों में एस्टिवेशन (ग्रीष्म निद्रा) भी करती हैं, जिससे वह ज्यादा गर्मी से बच सकें। नींद के दौरान सांपों की त्वचा का नवीनीकरण (खाल बदलना) भी शुरू हो सकता है। सांप इतनी गहरी नींद में सोते हैं कि कभी-कभी उन्हें जागने में काफी समय लगता है ।
