राजनीति में वंशवाद के विरोधी व रामायण मेला के जनक डॉ. राम मनोहर लोहिया की आज जयंती

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मनोज श्रीवास्तव
लखनऊ।राजनीति को आय का साधन, राजनीति में वंशवाद के विरोधी व रामायण मेला के जनक डॉ. राम मनोहर लोहिया की आज जयंती हैं। उन्होंने 1960 के दशक में रामायण मेला की परिकल्पना की थी, जिसका उद्देश्य भारत की एकता को बढ़ावा देना और विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में रामायण के महत्व पर प्रकाश डालना था। पहला आयोजन चित्रकूट में 1973 में तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी द्वारा किया गया था, जबकि अयोध्या में इसकी शुरुआत 1982 में हुई थी।

उनका विचार था कि यह आयोजन भारत की एकता को बढ़ावा देगा और तुलसी की रामायण के साथ-साथ अन्य क्षेत्रीय रामायणों (जैसे कम्बन की तमिल रामायण, एकनाथ की मराठी रामायण) पर भी विचार-विमर्श का मंच बनेगा। अयोध्या में रामायण मेला का आरंभ 1982 में तत्कालीन मुख्यमंत्री श्रीपति मिश्र ने शुरू किया था। कथित समाजवादी लोहिया जी के वैचारिक थाती के दावेदारी करने वाले उनके सिद्धांतों को रौंद कर परिवारवादी, जातिवादी, होने के साथ सत्ता में रहते राजनीति में आर्थिक भ्रष्टाचार को महत्वपूर्ण संरक्षण दिया।

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अंग्रेजी स्कूल में अपने बच्चों को पढ़ा कर समाज में हिंदी को बढ़ावा देने का भाषण परोस रहे हैं। अपने बच्चों को लंदन में पढ़ाई के साथ घुड़सवारी सिखा रहे हैं, जिस समाज के रहनुमा होने का ढिढोरा पीटते हैं उनके बच्चों को ढंग का प्राथमिक विद्यालय भी नहीं उपलब्ध करवा पाये। लोहिया जी रामायण, महाभारत व गीता से सामाजिक समन्वय स्थापित करने की बात करते थे। उनका वैचारिक वंश होने का दावा करने वाले फिल्मी कलाकारों को मंहगे खर्चे पर बुला कर नाच-गानों का आयोजन कर महोत्सव मनाते हैं। हर पल इसी डर में जीते हैं कि उनके जीवन मे कहीं लोहिया जी का आदर्श व्यवहार में न आ जाये।

उनके नाम पर पूंजीपति बने चंद राजनैतिक परिवार आर्थिक साम्राज्य स्थापित कर लोहिया जी हर पल अपमानित कर रहे हैं। लोहिया जी जब पिछड़ों को 60% आरक्षण (डॉ लोहिया ने बाँधी गांठ, पिछड़े पावें 100 में 60) की जब वकालत किये थे यदि कांग्रेस उनके सुझावों पर जरा भी सहयोगी होती तो आज पिछड़े समाज की सामाजिक और आर्थिक शक्ति शिखर पर कीर्तिमान बन कर लहराता। लोहिया जी के रामायण मेले, राम के चरित्र को रामलीला के माध्यम से अयोध्या से लेकर विदेश तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर स्तर पर पहुंचा रहे हैं।

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सतत प्रयास से आरंभ हुआ दीपावली के अवसर पर तीन दिन तक चलने वाला दीपोत्सव हर वर्ष रिकॉर्ड दीप जला कर अपना ही पुराना कीर्तिमान तोड़ नया रिकॉर्ड बनाते हुये ग्रीनिज बुक में नये आंकड़ों के साथ दर्ज होता है। हजारों स्थानीय हाथों उतने दिन काम मिलता है। कंबोडिया, मॉरिशस, श्रीलंका, नेपाल से लोग अयोध्या का दीपोत्सव देखने आते हैं।

लोहिया जी होते तो आज इस मुद्दे पर सीमा तोड़ कर कहते कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा से निकलने वालों ने सांस्कृतिक राम के विश्वव्यापी स्वरूप को नित नया आयाम दे रहे हैं। ज्यों-ज्यों राम के मर्यादित जीवन को अपने मे उतारने वाले बढ़ेंगे, स्वर्ग में डॉ लोहिया की आत्मा आनंदित अनुभूति करेगी।
लोहिया जी बहुत विराट व्यक्तित्व मैं उनके संदर्भ में दो शब्द भी लिख-बोल लूँ तो भगवान की बहुत कृपा मानूंगा। आप इसमें अपने बेबाक विचार जोड़िये मैं तो एक किंचन प्रयास किया हूँ। ज्यों-ज्यों इसमें आपका मार्गदर्शन मिलता जायेगा, आगे से वह इस मे जुड़ कर आयेगा। लोहिया जी को जन्मदिन पर कोटि कोटि प्रणाम।

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