दृष्टिबाधित बेटियों के हुनर ने जीता लोगों का दिल, चित्रकूट मेले में खुद संभाला कारोबार; बन रहीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

चित्रकूट: दीपावली के मौके पर चित्रकूट में आयोजित पांच दिवसीय मेले में दृष्टिबाधित बेटियां अपने हौसले और हुनर से लोगों का ध्यान खींच रही हैं। सामाजिक संस्था दृष्टि की ओर से प्रशिक्षित ये बालिकाएं अपने हाथों से तैयार किए गए उत्पादों को न सिर्फ बेच रही हैं, बल्कि स्टाल का संचालन भी खुद कर रही हैं। उनका यह प्रयास आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक मजबूत कदम है। मेले में दीपावली तक उनके बनाए सामान की बिक्री जारी रहेगी।

स्टाल पर मोमबत्ती से लेकर मसालों तक की बिक्री

दृष्टि संस्था के स्टाल पर कई तरह के हस्तनिर्मित उत्पाद उपलब्ध हैं। इनमें अलग-अलग डिजाइन और खुशबू वाली मोमबत्तियां, विभिन्न प्रकार की अगरबत्तियां, चार खुशबुओं में परफ्यूम, घरेलू शुद्ध मसाले और मिठाई रखने के खाली पैकिंग डिब्बे शामिल हैं।

बालिकाएं इन उत्पादों को ग्राहकों को दिखाने, उनकी बिक्री करने और पूरे स्टाल की जिम्मेदारी संभालने का काम खुद कर रही हैं। मेले में आने वाले लोग उनके प्रयास और उत्पादों की सराहना कर रहे हैं।

2021 में शुरू हुआ था स्वरोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम

संस्था के संस्थापक महासचिव शंकर लाल गुप्ता ने बताया कि बेरोजगार दृष्टिबाधित बालिकाओं को घर बैठे रोजगार उपलब्ध कराने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से 15 अक्टूबर 2021 को स्वरोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया था।

इस कार्यक्रम के तहत बालिकाओं को छह महीने से लेकर एक साल तक का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसमें मोमबत्ती, अगरबत्ती, मसाले, अचार, परफ्यूम, लिफाफे और मिठाई के खाली डिब्बे बनाने का हुनर सिखाया जाता है।

उत्पाद बनाने के साथ कारोबार चलाने की भी मिलती है जानकारी

प्रशिक्षण के दौरान बालिकाओं को केवल सामान तैयार करना ही नहीं सिखाया जाता, बल्कि बाजार में उत्पाद बेचने और कारोबार संभालने की जानकारी भी दी जाती है। उन्हें विपणन, लाभ की गणना और हिसाब-किताब रखने का तरीका बताया जाता है।

संस्था का उद्देश्य है कि प्रशिक्षण पूरा करने के बाद ये बालिकाएं अपने घर से ही स्वरोजगार शुरू कर सकें और नियमित आमदनी हासिल कर सकें।

मेले में पहुंचे अतिथियों ने उत्पादों की तारीफ की

मेले का उद्घाटन करने वाले डॉ. रोहित सिंह, डॉ. दीक्षा सिंह और डॉ. एसपी त्रिपाठी ने स्टाल पर मौजूद उत्पादों की सराहना की। उन्होंने सामान को शुद्ध और ताजा बताया, जबकि मोमबत्तियों के आकर्षक डिजाइन की भी तारीफ की।

संस्था के सचिव बलबीर सिंह, समाजसेवी अनीता सिंह और पंकज दुबे समेत कई लोगों ने स्टाल से सामान खरीदा और बालिकाओं का उत्साह बढ़ाया।

कई जिलों की बेटियां अपने हुनर से कमा रहीं आमदनी

स्टाल पर सामान बेच रहीं जबलपुर की जानकी बरकडे, बांदा की चंद्रावती और सुमन, हमीरपुर की शालिनी, पन्ना की निशा कबीरपंथी और चित्रकूट की मनीषा ने अपने अनुभव साझा किए।

उन्होंने बताया कि पहले वे घर पर खाली रहती थीं, लेकिन संस्था से प्रशिक्षण लेने के बाद अब अपना रोजगार कर रही हैं। वे सालभर अलग-अलग जगहों पर जाकर अपने उत्पाद बेचती हैं। उनके मुताबिक, लोग उनके बनाए सामान को पसंद करते हैं और उसकी तारीफ भी करते हैं।

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