चक्रवात मुरासु ने आंध्र प्रदेश में मचाई भारी तबाही, 2 लोगों की मौत और हजारों पेड़ उखड़े; अब इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

अमरावती: बंगाल की खाड़ी से उठा चक्रवाती तूफान मुरासु आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में भारी तबाही मचाने के बाद कमजोर जरूर पड़ गया है, लेकिन इसका खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। मंगलवार तड़के 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार और 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक के झोंकों के साथ तूफान ने ओंगोल के पास तट पार किया। चक्रवात से जुड़ी घटनाओं में राज्य में दो लोगों की जान चली गई। तेज हवाओं और बारिश के कारण हजारों पेड़ उखड़ गए, बिजली के सैकड़ों खंभे क्षतिग्रस्त हुए और कई इलाकों में जलभराव हो गया। अब इसके प्रभाव से तेलंगाना, छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।

आंध्र प्रदेश में चक्रवात से भारी नुकसान

मुरासु के तट से टकराने के बाद आंध्र प्रदेश के कई जिलों में तेज हवाओं और मूसलाधार बारिश का असर देखने को मिला। राष्ट्रीय राजमार्गों पर वाहन फंसने से यातायात प्रभावित हुआ। कई जगह बिजली के खंभे गिरने और पेड़ उखड़ने से सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया।

राज्य के 15 जिलों के 132 मंडलों में चक्रवात का असर दर्ज किया गया है। इसके चलते 30,661 हेक्टेयर में खड़ी फसलें प्रभावित हुई हैं, जबकि 312 मकानों को नुकसान पहुंचा है। कई निचले इलाकों में पानी भरने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

कमजोर पड़ा मुरासु, अब गहरे दबाव के क्षेत्र में बदला

मौसम विभाग के मुताबिक, मंगलवार तड़के आंध्र प्रदेश के तट से टकराने के बाद मुरासु की ताकत में लगातार कमी आई है। इसे गंभीर चक्रवात की श्रेणी से हटाकर गहरे दबाव के क्षेत्र में बदल दिया गया है। अनुमान है कि बुधवार तक यह कमजोर होकर कम दबाव वाली मौसम प्रणाली में तब्दील हो सकता है।

मंगलवार दोपहर तक इसका केंद्र आंध्र प्रदेश के बापटला से लगभग 40 किलोमीटर पश्चिम-उत्तर पश्चिम और विजयवाड़ा से करीब 80 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में था। उस समय केंद्र के आसपास हवा की निरंतर गति 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे दर्ज की गई। इससे पहले हवा की रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच रही थी। मौसम विज्ञानियों के अनुसार, गहरे दबाव के चरण में हवा की गति घटकर 55 से 65 किलोमीटर प्रति घंटा रह सकती है, जबकि झोंकों की रफ्तार 75 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है।

मंगलवार तड़के ओंगोल के पास हुआ लैंडफॉल

मौसम विज्ञान विभाग और आंध्र प्रदेश आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, गंभीर चक्रवाती तूफान मुरासु मंगलवार सुबह करीब साढ़े तीन बजे से साढ़े पांच बजे के बीच नेल्लोर और नरसापुरम के बीच ओंगोल के पास तट से टकराया। उस समय हवा की रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटा थी और तेज झोंके 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच रहे थे।

तट पार करने के बाद तूफान उत्तर-उत्तर पश्चिम दिशा में आगे बढ़ा और धीरे-धीरे कमजोर होकर चक्रवाती तूफान से गहरे दबाव के क्षेत्र में बदल गया।

आंध्र प्रदेश में राहत और बचाव कार्य जारी

चक्रवात कमजोर पड़ने के बावजूद आंध्र प्रदेश के कई जिलों में बारिश और तेज हवाओं का असर बना हुआ है। आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के प्रबंध निदेशक प्रखर जैन के मुताबिक, एनटीआर, पोलावरम, कृष्णा, बापटला, काकीनाडा और पलनाडु जिलों में भारी बारिश का पूर्वानुमान है। वहीं नांदयाल, पूर्वी गोदावरी, पश्चिमी गोदावरी और एलुरु जिलों में मध्यम बारिश जारी रहने की संभावना है।

सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी गई है। राहत एवं बचाव कार्यों के लिए 24 टीमें तैनात की गई हैं। फिलहाल 10,805 लोग राहत शिविरों में शरण लिए हुए हैं।

तेलंगाना के तीन जिलों में रेड अलर्ट

मुरासु के उत्तर-उत्तर पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने के कारण तेलंगाना के मौसम पर भी असर पड़ने की आशंका है। मौसम विभाग ने भद्राद्रि कोठागुडेम, खम्मम और सूर्यपेट जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में अगले 24 घंटों के दौरान अत्यधिक भारी बारिश होने की आशंका जताई गई है।

महबूबाबाद जिले में भी कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा अगले 48 घंटों में तेलंगाना के कई इलाकों में गरज-चमक के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और बारिश होने की चेतावनी दी गई है। राज्य में अगले पांच दिनों तक हल्की से मध्यम बारिश जारी रहने का अनुमान है।

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में भी बारिश की आशंका

चक्रवात के असर से छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के कई जिलों में भी मौसम बदल सकता है। मौसम विभाग ने सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा और बस्तर समेत आसपास के इलाकों में बारिश और तेज हवाओं की संभावना जताई है।

इन क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। कुछ स्थानों पर तेज बारिश होने की भी आशंका है। ऐसे में प्रभावित राज्यों के लोगों को मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।

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