नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने विदेशी चंदा प्राप्त करने और उसके उपयोग से जुड़े नियमों को और कड़ा करते हुए विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) के तहत कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। गृह मंत्रालय ने अधिनियम की धारा 41(1) के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए नए संशोधित प्रावधानों को लागू करने की अधिसूचना जारी की है। नए नियमों के तहत विदेशी फंडिंग के दुरुपयोग, नियमों के उल्लंघन और निर्धारित सीमा से अधिक प्रशासनिक खर्च करने पर जुर्माने की राशि में संशोधन किया गया है।
प्रशासनिक खर्च की सीमा पार करने पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ
संशोधित नियमों के अनुसार यदि कोई संगठन विदेशी चंदे का 20 प्रतिशत से अधिक हिस्सा प्रशासनिक खर्चों पर खर्च करता है, तो उसे एक लाख रुपये या निर्धारित सीमा से अधिक खर्च की गई राशि के 5 प्रतिशत के बराबर जुर्माना देना होगा। दोनों में जो राशि अधिक होगी, वही लागू की जाएगी।
सट्टेबाजी और जोखिम भरे निवेश पर सख्त कार्रवाई
सरकार ने विदेशी चंदे को सट्टेबाजी या जोखिमपूर्ण गतिविधियों में लगाने पर भी कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया है। ऐसे मामलों में संबंधित संस्था पर एक लाख रुपये या निवेश की गई राशि के 30 प्रतिशत के बराबर जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा ऐसी गतिविधियों से अर्जित पूरी आय भी सरकार द्वारा वसूल की जाएगी।
निर्धारित उद्देश्य से अलग खर्च करने पर भी दंड
यदि किसी संस्था को विदेशी चंदा किसी विशेष उद्देश्य के लिए प्राप्त हुआ है और उसका उपयोग किसी अन्य कार्य में किया जाता है, तो उस पर भी एक लाख रुपये या संबंधित राशि के 30 प्रतिशत तक का जुर्माना लगाया जाएगा। इसी तरह बिना अनुमति, गलत उद्देश्य या पंजीकरण से अलग क्षेत्र में विदेशी चंदे के उपयोग पर भी समान दंड का प्रावधान किया गया है।
विदेशी फंडिंग के लिए आवेदन प्रक्रिया में बदलाव
सरकार ने विदेशी फंड प्राप्त करने से संबंधित आवेदन प्रक्रिया में भी महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। अब किसी भी गैर-सरकारी संगठन को एफसीआरए के तहत आवेदन करते समय यह स्पष्ट करना होगा कि वह किन उद्देश्यों के लिए कार्य करेगा और किन राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में अपनी गतिविधियां संचालित करेगा।
आवेदन के दौरान संस्थाओं को केवल सरकार द्वारा निर्धारित सूची में शामिल उद्देश्यों का ही चयन करना होगा। इन श्रेणियों में धार्मिक, सांस्कृतिक, आर्थिक, शैक्षणिक और सामाजिक गतिविधियां शामिल हैं।
धर्म परिवर्तन को पात्र श्रेणियों से बाहर रखा गया
संशोधित नियमों में कई प्रकार की धार्मिक गतिविधियों को अनुमति दी गई है, लेकिन पंजीकरण के लिए पात्र श्रेणियों में धर्म परिवर्तन से संबंधित गतिविधियों को स्पष्ट रूप से शामिल नहीं किया गया है। इससे इस क्षेत्र में काम करने वाली संस्थाओं के लिए नियम और अधिक स्पष्ट हो गए हैं।
विदेशी नागरिकों की भूमिका पर भी नई शर्तें
गृह मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन संस्थाओं के प्रमुख पदाधिकारियों में भारतीय मूल के लोगों के अलावा विदेशी नागरिक शामिल हैं, उनके एफसीआरए पंजीकरण या पूर्व स्वीकृति के आवेदनों पर सामान्यतः विचार नहीं किया जाएगा।
हालांकि विशेष परिस्थितियों में केंद्र सरकार अलग से आदेश जारी कर ऐसे मामलों में छूट प्रदान कर सकती है और विदेशी नागरिकों को संस्था के प्रमुख पदाधिकारी के रूप में कार्य करने की अनुमति दे सकती है।
मुख्य पदाधिकारी की परिभाषा हुई विस्तृत
नए नियमों के तहत “मुख्य पदाधिकारी” की परिभाषा को भी व्यापक बनाया गया है। अब इसमें कंपनी के निदेशक, साझेदारी फर्म के भागीदार, ट्रस्टी, हिंदू अविभाजित परिवार के कर्ता और संगठन के प्रबंधन या निर्णय प्रक्रिया पर नियंत्रण रखने वाले अन्य व्यक्तियों को भी शामिल किया गया है।
पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने पर जोर
सरकार का कहना है कि इन संशोधनों का उद्देश्य विदेशी फंड प्राप्त करने वाले संगठनों में अधिक पारदर्शिता, जवाबदेही और वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करना है। नए नियमों के लागू होने के बाद विदेशी चंदे के उपयोग और उसकी निगरानी की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सख्त हो जाएगी।
