नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए भारत सरकार ने फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के लिए औपचारिक ‘लेटर ऑफ रिक्वेस्ट’ (LoR) जारी कर दिया है। करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये के इस प्रस्तावित रक्षा सौदे को देश के इतिहास की सबसे बड़ी लड़ाकू विमान खरीद परियोजनाओं में गिना जा रहा है। इस सौदे की खास बात यह है कि अधिकांश विमानों का निर्माण भारत में किए जाने की योजना है, जिससे रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को नई गति मिलने की उम्मीद है।
फ्रांस दौरे पर वायुसेना प्रमुख, रक्षा सहयोग पर होगी अहम चर्चा
भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह 1 जून से फ्रांस की आधिकारिक यात्रा पर हैं। अपने दौरे के दौरान वह राफेल विमान बनाने वाली कंपनी के उत्पादन केंद्रों का निरीक्षण करेंगे। इसके अलावा मिसाइल निर्माण से जुड़ी प्रमुख रक्षा सुविधाओं का भी दौरा करेंगे, जिनकी तकनीक और हथियार भारतीय वायुसेना के कई प्लेटफॉर्म पर उपयोग किए जाते हैं। यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब दोनों देशों के बीच राफेल सौदे को अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से काम चल रहा है।
भारत में होगा बड़े पैमाने पर निर्माण
प्रस्तावित समझौते के तहत 114 में से लगभग 94 से 96 राफेल विमानों का निर्माण भारत में किया जा सकता है, जबकि शुरुआती खेप के विमान सीधे फ्रांस से आपूर्ति किए जाएंगे। भारत ने इस सौदे में तकनीक हस्तांतरण, स्वदेशी हथियारों के एकीकरण, भारतीय डेटा लिंक प्रणाली और स्थानीय उत्पादन को प्रमुख शर्तों के रूप में रखा है। सरकार का लक्ष्य रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में व्यापक घरेलू भागीदारी सुनिश्चित करना है।
राफेल सौदे की प्रमुख विशेषताएं
इस रक्षा परियोजना के तहत कुल 114 राफेल लड़ाकू विमान शामिल होंगे, जिनमें 88 सिंगल-सीटर और 26 ट्विन-सीटर ट्रेनर विमान होंगे। इन विमानों में अत्याधुनिक एईएसए रडार, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइल क्षमता उपलब्ध होगी। परियोजना में 55 से 60 प्रतिशत तक स्थानीयकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। साथ ही इंजन, एयरफ्रेम और एवियोनिक्स तकनीक के क्षेत्र में भी भारत और फ्रांस के बीच सहयोग बढ़ने की संभावना है।
AMCA और रक्षा उद्योग को भी मिल सकता है लाभ
राफेल खरीद से आगे बढ़कर दोनों देशों के बीच भविष्य के रक्षा सहयोग पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। इसमें स्वदेशी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) कार्यक्रम के लिए इंजन तकनीक, भारत में एयरोस्पेस विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र का विस्तार और दीर्घकालिक रक्षा साझेदारी को मजबूत बनाने जैसे विषय शामिल हो सकते हैं।
DAC से मिल चुकी है मंजूरी
फरवरी 2026 में रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की बैठक में भारतीय वायुसेना के लिए 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) खरीद परियोजना को ‘एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी’ (AoN) प्रदान की गई थी। इसके बाद से इस महत्वाकांक्षी रक्षा सौदे को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह परियोजना भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता में बड़ा बदलाव ला सकती है और आने वाले वर्षों में देश की सामरिक शक्ति को नई मजबूती प्रदान कर सकती है।
