नई दिल्ली: प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के पूर्व सदस्य और वरिष्ठ अर्थशास्त्री सुरजीत भल्ला ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों को लेकर तीखी टिप्पणी की है। कभी मोदी सरकार के समर्थकों में गिने जाने वाले भल्ला अब खुलकर सरकार की आर्थिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
21 मई को प्रकाशित अपने एक लेख में सुरजीत भल्ला ने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी राजनीतिक रूप से लगातार मजबूत होती जा रही है, लेकिन आर्थिक मोर्चे पर स्थिति कमजोर दिखाई दे रही है। उन्होंने लिखा कि “बीजेपी चुनाव जीत रही है, लेकिन अर्थव्यवस्था हार रही है।”
सितंबर 2017 से दिसंबर 2018 तक प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद में सदस्य रहे भल्ला ने अपने लेख में पश्चिम बंगाल में बीजेपी की बढ़ती राजनीतिक पकड़ को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि पार्टी 2029 के आम चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में और बड़े जनादेश की उम्मीद कर सकती है। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि आर्थिक प्रदर्शन के मामले में सरकार की स्थिति लगातार गिरती नजर आ रही है।
आर्थिक हालात पर उठाए गंभीर सवाल
सुरजीत भल्ला ने सवाल किया कि क्या बीजेपी की लगातार चुनावी सफलता और आर्थिक मोर्चे पर कमजोरी केवल संयोग है या फिर दोनों के बीच कोई गहरा संबंध मौजूद है। उन्होंने मौजूदा आर्थिक अव्यवस्था के पीछे चार बड़े कारणों का जिक्र किया।
भल्ला के मुताबिक, सरकार समस्याओं को पहचानने के बावजूद उनकी जिम्मेदारी स्वीकार करने से बचती है और अक्सर दोष दूसरों पर डालने की कोशिश करती है। उन्होंने बड़े उद्योग जगत की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि मौजूदा आर्थिक ढांचे में उसकी भागीदारी भी गंभीर समीक्षा की मांग करती है।
पहले कर चुके थे सरकार की तारीफ
दिलचस्प बात यह है कि अक्टूबर 2018 में सुरजीत भल्ला ने मोदी सरकार के पहले चार वर्षों को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए “सबसे अच्छे साल” बताया था। ऐसे में अब उनका बदला हुआ रुख राजनीतिक और आर्थिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गया है।
भल्ला की ताजा टिप्पणी ऐसे समय में सामने आई है जब देश में आर्थिक विकास, रोजगार, निवेश और महंगाई जैसे मुद्दों को लेकर लगातार बहस तेज हो रही है। उनके बयान को विपक्ष सरकार की आर्थिक नीतियों पर हमले के तौर पर भी देख रहा है।
