लखनऊ। उत्तर प्रदेश के अटल और विहान आवासीय विद्यालयों में पढ़ने वाले श्रमिक परिवारों और अनाथ बच्चों के लिए एक शानदार पहल की शुरुआत हुई है। अब इन बच्चों की शिक्षा किताबी ज्ञान तक ही सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वे आधुनिक विज्ञान और तकनीकी प्रयोगशालाओं (लैब) का व्यावहारिक अनुभव भी ले सकेंगे।
प्रमुख सचिव तकनीकी शिक्षा, श्रम एवं सेवायोजन डॉ. एम. के. शन्मुगा सुन्दरम की विशेष पहल पर, डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय (AKTU) ने अपनी महत्वाकांक्षी ‘लैब ऑन व्हील्स’ (Lab on Wheels) बस को प्रदेश के सभी अटल और विहान आवासीय विद्यालयों तक पहुंचाने की तैयारी तेज कर दी है।
प्रमुख सचिव के निरीक्षण के बाद बनी योजना
बीती 13 मई को विश्वविद्यालय की कार्यकारी समिति की बैठक के दौरान प्रमुख सचिव डॉ. एम. के. शन्मुगा सुन्दरम ने AKTU परिसर में संचालित ‘लैब ऑन व्हील्स’ बस का बारीकी से निरीक्षण किया था। बच्चों के भविष्य को देखते हुए उन्होंने कुलपति डॉ. ए. के. पांडे से अनुरोध किया कि इस आधुनिक मोबाइल लैब का लाभ अटल आवासीय विद्यालयों के गरीब बच्चों को भी मिलना चाहिए।

पहले ही दौरे में बच्चों में दिखा भारी उत्साह
प्रमुख सचिव की पहल पर त्वरित कार्रवाई करते हुए अगले ही दिन, यानी 14 मई को इस बस को प्रयोगात्मक तौर पर अटल आवासीय विद्यालय भेजा गया। वहां बस के भीतर मौजूद आधुनिक विज्ञान और तकनीक से जुड़े उपकरणों को देखकर बच्चों का उत्साह सातवें आसमान पर था। छात्रों ने न केवल उपकरणों को देखा, बल्कि खुद कई प्रयोग भी किए और वैज्ञानिकों व शिक्षकों से अपनी जिज्ञासाओं को लेकर कई सवाल पूछे।
बच्चों की इसी रुचि और सीखने की ललक को देखते हुए प्रमुख सचिव ने निर्देश दिया है कि ग्रीष्मकालीन अवकाश (समर वेकेशन) के बाद इस ‘लैब ऑन व्हील्स’ बस को प्रदेश के सभी 18 अटल आवासीय विद्यालयों और 24 विहान विद्यालयों में बारी-बारी से भेजा जाए।
जानिए क्या हैं ‘अटल’ और ‘विहान’ आवासीय विद्यालय?
यह पहल उत्तर प्रदेश के उन बच्चों की जिंदगी बदल रही है जो आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आते हैं। इन दोनों विद्यालयों का स्वरूप इस प्रकार है:

अटल आवासीय विद्यालय: सीबीएसई पैटर्न पर आधुनिक शिक्षा
किनके लिए: ये विद्यालय विशेष रूप से निर्माण श्रमिकों के बच्चों और कोविड-19 महामारी के दौरान अपने माता-पिता को खो चुके अनाथ बच्चों के लिए बनाए गए हैं।
क्षमता और संख्या: उत्तर प्रदेश के प्रत्येक मंडल में एक, यानी कुल 18 अटल आवासीय विद्यालय संचालित हैं। हर स्कूल में 1000 विद्यार्थियों (500 छात्र और 500 छात्राएं) के रहने की व्यवस्था है।
शिक्षण व्यवस्था: यहाँ सीबीएसई (CBSE) पाठ्यक्रम के अनुसार पढ़ाई होती है। बच्चों को पढ़ाने के लिए नवोदय, केंद्रीय और सैनिक विद्यालयों के सेवानिवृत्त व अनुभवी शिक्षकों के साथ-साथ यूपी बोर्ड के चुनिंदा उत्कृष्ट शिक्षकों को नियुक्त किया गया है।

शानदार परीक्षा परिणाम: इस वर्ष अटल आवासीय विद्यालयों के पहले बैच (2178 विद्यार्थियों) ने कक्षा 10वीं की सीबीएसई बोर्ड परीक्षा दी, जिसमें कुल 93.15% बच्चे उत्तीर्ण हुए। प्रयागराज और वाराणसी के स्कूलों का रिजल्ट तो शत-प्रतिशत (100%) रहा, जबकि 15 स्कूलों का पास प्रतिशत 90% से अधिक रहा।
क्षमता और संख्या: प्रदेश के 12 जिलों में ऐसे 24 विहान विद्यालय हैं (प्रत्येक जनपद में बालक और बालिकाओं के लिए अलग-अलग एक-एक विद्यालय)।
शिक्षण व्यवस्था: यह स्कूल कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की तर्ज पर काम करते हैं। यहाँ कक्षा 6 से 8 तक की पढ़ाई होती है और प्रत्येक कक्षा की क्षमता 100 विद्यार्थियों की है। ये स्कूल राज्य के पाठ्यक्रम (यूपी बोर्ड) से संबद्ध हैं और इनमें हिंदी माध्यम से शिक्षा दी जाती है।

डिजिटल इंडिया और व्यावहारिक ज्ञान को मिलेगा बढ़ावा
अटल और विहान विद्यालयों के इन होनहार बच्चों के पास अब तक बड़ी-बड़ी प्रयोगशालाओं का अनुभव नहीं था। ‘लैब ऑन व्हील्स’ के जरिए चलते-फिरते विज्ञान केंद्र का उनके स्कूल पहुंचना, इन बच्चों के वैज्ञानिक दृष्टिकोण को मजबूत करेगा। अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से आने वाले समय में इन वंचित वर्ग के बच्चों के बीच से भी बेहतरीन वैज्ञानिक, इंजीनियर और नवप्रवर्तक (Innovators) निकलकर सामने आएंगे।
विहान आवासीय विद्यालय श्रम विभाग द्वारा संचालित हैं।
12 जिलों में ऐसे 24 विद्यालय हैं। प्रत्येक जनपद में बालक और बालिका के लिए एक-एक विद्यालय है। ये विद्यालय राज्य के पाठ्यक्रम से संबद्ध हैं और इनमें हिंदी में शिक्षा दी जाती है। ये विद्यालय कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की तर्ज पर बनाए गए हैं। ये विद्यालय श्रमिकों के बच्चों के लिए हैं। इन विद्यालयों में कक्षा 6 से 8 तक की कक्षाएं हैं। प्रत्येक कक्षा में 100 विद्यार्थियों की क्षमता है।
