मुंबई: खाड़ी देशों में युद्ध के चलते एलपीजी आपूर्ति पर पड़ रहे असर के बीच महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा और त्वरित फैसला लिया है। राज्य सरकार ने सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के विस्तार को युद्धस्तर पर पूरा करने के निर्देश दिए हैं, ताकि पाइप नेचुरल गैस की पहुंच तेजी से बढ़ाई जा सके और एलपीजी पर निर्भरता कम हो।
कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसले के तहत सरकार ने साफ किया है कि राज्यभर में पीएनजी नेटवर्क को प्राथमिकता देते हुए सभी प्रक्रियाओं को सरल और तेज बनाया जाएगा।
युद्धस्तर पर विस्तार, मंजूरी की प्रक्रिया आसान
सरकार के निर्णय के मुताबिक, गैस पाइपलाइन बिछाने से जुड़ी लंबित सभी अनुमतियों को अब स्वतः मंजूर माना जाएगा। वहीं नए आवेदनों को 24 घंटे के भीतर मंजूरी देने का प्रावधान किया गया है। काम में तेजी लाने के लिए सड़क मरम्मत शुल्क पूरी तरह माफ कर दिया गया है और कंपनियों को 24 घंटे काम करने की अनुमति दे दी गई है।
अब NOC की जरूरत नहीं, नियमों में ढील
प्रक्रिया को और आसान बनाते हुए सरकार ने अग्निशमन विभाग और ट्रैफिक पुलिस से एनओसी लेने की अनिवार्यता खत्म कर दी है। इसके साथ ही संबंधित नियमों और शर्तों में भी ढील दी गई है, ताकि किसी तरह की प्रशासनिक देरी न हो और परियोजनाएं तेजी से पूरी हो सकें।
PNG को मिला ‘अत्यावश्यक सेवा’ का दर्जा
राज्य सरकार ने पाइप नेचुरल गैस को अब पानी और बिजली की तरह ‘अत्यावश्यक सेवा’ की श्रेणी में शामिल कर दिया है। इस फैसले से गैस आपूर्ति को प्राथमिकता मिलेगी और आपात स्थिति में भी इसका संचालन निर्बाध रूप से जारी रखा जा सकेगा।
घरेलू उपयोग को प्राथमिकता
सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने का फैसला किया है। इसके साथ ही होटल, स्कूल, अस्पताल, सामुदायिक रसोई और हॉस्टलों को कमर्शियल दरों पर 50 प्रतिशत गैस आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी, ताकि जरूरी सेवाएं प्रभावित न हों।
पूरे अभियान की निगरानी के लिए राशनिंग नियंत्रक और नागरिक आपूर्ति निदेशक को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। सरकार का यह आदेश 30 जून 2026 तक प्रभावी रहेगा।
