मुंबई: दिग्गज अभिनेत्री जरीन खान के निधन के बाद उनके अंतिम संस्कार को लेकर उठे विवाद पर अब उनके बेटे जायेद खान ने पहली बार खुलकर अपनी बात रखी है। सोशल मीडिया पर उस वक्त उन्हें ट्रोल किया गया था, जब उनकी मां का अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाजों से किया गया। अब जायेद ने साफ किया है कि उन्होंने वही किया, जो उनकी मां की अंतिम इच्छा थी।
ट्रोलिंग पर तोड़ी चुप्पी, दिया स्पष्ट जवाब
हाल ही में एक इंटरव्यू में जायेद खान ने इस मुद्दे पर भावुक होते हुए कहा कि उनके परिवार में इंसानियत को सबसे बड़ा धर्म माना जाता है। उन्होंने कहा कि उनके घर में अलग-अलग धर्मों के लोग साथ रहते हैं और परिवार धर्म को एक निजी विषय मानता है। जायेद के मुताबिक, यह तय करना किसी और का अधिकार नहीं कि कौन सा धर्म सही या गलत है।
‘मां की आखिरी इच्छा पूरी करना सबसे जरूरी’
जायेद खान ने बताया कि उनकी मां ने जीवन के अंतिम दिनों में अपनी इच्छा जाहिर की थी कि उनकी अस्थियां किसी नदी में प्रवाहित की जाएं। उन्होंने एक पुराना किस्सा साझा करते हुए कहा कि उनकी मां ने खुद उनसे कहा था कि वह इस दुनिया से जाने के बाद आजादी चाहती हैं और उनकी अस्थियों का विसर्जन नदी में किया जाए। जायेद ने कहा कि उनके लिए मां की आखिरी इच्छा को पूरा करना सबसे अहम था, न कि लोगों की आलोचना।
‘नफरत भरी बातों से फर्क नहीं पड़ता’
ट्रोलिंग पर प्रतिक्रिया देते हुए जायेद ने कहा कि उन्हें इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि लोग क्या कहते हैं। उन्होंने माना कि समाज में कुछ हालात ऐसे हैं, जहां लोग जल्दी जज कर लेते हैं, लेकिन समय के साथ ये सोच बदलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि वह किसी को दोष नहीं देते, बल्कि इसे परिस्थितियों का असर मानते हैं।
7 नवंबर को हुआ था निधन
जरीन खान का निधन पिछले साल 7 नवंबर को मुंबई स्थित उनके घर पर हुआ था। उनकी मौत उम्र से जुड़ी बीमारियों के कारण हुई थी। पारसी पृष्ठभूमि से होने के बावजूद उनके अंतिम संस्कार में हिंदू परंपराओं का पालन किया गया, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई थी।
फिल्मी करियर और निजी जीवन
जरीन खान ने हिंदी सिनेमा में भी काम किया था और उन्होंने दिग्गज अभिनेता देव आनंद के साथ फिल्म ‘तेरे घर के सामने’ (1963) में अभिनय किया था। 1960 के दशक में उनकी मुलाकात संजय खान से हुई, जिसके बाद दोनों ने 1966 में शादी कर ली।
