भारत का वो गांव जहां रंग नहीं, जलते अंगारों के बीच खेली जाती है होली! परंपरा ऐसी कि देखने वाले रह जाएं दंग

नई दिल्ली: होली को रंगों, गुलाल, मिठाइयों और उमंग का त्योहार माना जाता है। फाल्गुन पूर्णिमा के दिन देशभर में लोग एक-दूसरे को रंग लगाकर, नए वस्त्र पहनकर और मिठाइयां बांटकर इस पर्व को धूमधाम से मनाते हैं। लेकिन भारत की सांस्कृतिक विविधता इस त्योहार को कई अनोखे रूप भी देती है। कहीं लठमार होली खेली जाती है, कहीं फूलों से होली, तो कहीं राख, कीचड़ और यहां तक कि सब्जियों से भी। इसी विविधता के बीच एक ऐसा गांव भी है, जहां होली रंगों या फूलों से नहीं, बल्कि आग और अंगारों के साथ खेली जाती है।

मल्कार्नेम गांव की हैरान कर देने वाली परंपरा

दक्षिण गोवा में पणजी से करीब 80 किलोमीटर दूर स्थित मल्कार्नेम गांव अपनी अनोखी होली के लिए जाना जाता है। यहां के लोग होली के अवसर पर जलते अंगारों के बीच उत्सव मनाते हैं। यह परंपरा सदियों पुरानी बताई जाती है और हर साल बड़ी श्रद्धा और अनुशासन के साथ निभाई जाती है। इस आयोजन को देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं और आग के बीच खेली जाने वाली इस होली को देख हैरान रह जाते हैं।

होलिका दहन से अलग अंदाज में उत्सव

देश के कई हिस्सों में होली का आगाज ‘होलिका दहन’ से होता है, जिसे बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। लेकिन मल्कार्नेम गांव में यह पर्व केवल प्रतीकात्मक अग्नि तक सीमित नहीं रहता। यहां ग्रामीण परंपरा के तहत अपने शरीर पर गर्म अंगारे सहन करते हुए उत्सव का हिस्सा बनते हैं। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि साहस, धैर्य और आस्था की परीक्षा भी माना जाता है।

साहस और श्रद्धा का अनूठा संगम

आग के बीच होली खेलना सुनने में जितना भयावह लगता है, स्थानीय लोगों के लिए यह उतना ही पवित्र और गौरवपूर्ण आयोजन है। गांव के लोग इसे अपनी सांस्कृतिक पहचान और पूर्वजों की परंपरा से जोड़कर देखते हैं। हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग इस आयोजन में भाग लेकर अपनी बहादुरी और विश्वास का परिचय देते हैं।

भारत के इस छोटे से गांव की यह परंपरा दिखाती है कि एक ही त्योहार को अलग-अलग क्षेत्रों में कितने भिन्न और अनोखे तरीकों से मनाया जा सकता है। मल्कार्नेम की आग वाली होली न सिर्फ रोमांचक है, बल्कि भारतीय लोक संस्कृति की गहराई और विविधता का जीवंत उदाहरण भी है।

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