मंदिरों की आय जनकल्याण में लगे, सरकार के हाथ में न हो संचालन: मोहन भागवत का बड़ा बयान

लखनऊ में आयोजित एक प्रमुख जनगोष्ठी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने मंदिरों के संचालन और उनकी आय को लेकर अहम टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि देश के मंदिरों से होने वाली आय का बड़ा हिस्सा जनकल्याण के कार्यों में लगाया जाना चाहिए और मंदिरों का संचालन सरकार के बजाय जिम्मेदार भक्तों के हाथों में होना चाहिए।

डॉ. भागवत संघ के सौ वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने मंदिर प्रबंधन की पारदर्शिता पर जोर देते हुए कहा कि मंदिरों की आय और उसके उपयोग की पूरी प्रक्रिया स्पष्ट और जवाबदेह होनी चाहिए।

पारदर्शी व्यवस्था और निष्पक्ष निगरानी की वकालत

सरसंघचालक ने कहा कि मंदिरों की आय जनहित के कार्यों में लगे, इसके लिए किसी निष्पक्ष और ईमानदार संस्था की निगरानी आवश्यक है। उन्होंने संकेत दिया कि संघ इस दिशा में तैयारी कर रहा है और निकट भविष्य में इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं।

‘संघ सरकार नहीं चलाता, हम केवल सुझाव देते हैं’

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रबुद्धजनों के सवालों का जवाब देते हुए डॉ. भागवत ने संघ की भूमिका को लेकर भी अपनी बात रखी। सरकार चलाने से जुड़े सवाल पर उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह धारणा गलत है कि संघ सरकार को “रिमोट कंट्रोल” से चलाता है। उन्होंने कहा कि संघ केवल सुझाव देता है, शासन संचालन से उसका कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।

‘सबसे बड़ी चुनौती हिंदू समाज को जागरूक करना’

उन्होंने कहा कि संघ के सामने सबसे बड़ी चुनौती हिंदू समाज को जागरूक और संगठित करना है, जो एक सतत और परिश्रमपूर्ण प्रक्रिया है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता में अवसरवादी लोग आते-जाते रहते हैं, लेकिन संघ की कार्यपद्धति इतनी सुदृढ़ है कि जो लोग केवल लाभ की अपेक्षा से जुड़ते हैं, वे लंबे समय तक टिक नहीं पाते।

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