44,259 लोगों की जांच में संक्रमण की पुष्टि, 351 मरीज ART से जुड़े; MGM मेडिकल कॉलेज में सबसे ज्यादा मामले दर्ज
इंदौर। शहर में एचआईवी संक्रमण के नए मामलों ने स्वास्थ्य विभाग के सामने मरीजों की पहचान और उन्हें नियमित उपचार से जोड़ने की चुनौती खड़ी कर दी है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 44,259 लोगों की जांच में 357 नए एचआईवी संक्रमित मरीजों की पहचान हुई है। इनमें से 351 मरीजों को एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी (ART) से जोड़ा जा चुका है, जबकि छह मरीज अब भी उपचार से बाहर हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, एचआईवी संक्रमण की समय पर पहचान और नियमित उपचार मरीजों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में संक्रमित पाए गए प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचना, उसकी काउंसलिंग करना और उपचार जारी रखने में मदद करना जरूरी है।
MGM मेडिकल कॉलेज में सबसे ज्यादा मामले
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, MGM मेडिकल कॉलेज में 1,152 लोगों की जांच के दौरान 215 संक्रमित मरीज दर्ज किए गए। इनमें से 209 मरीजों को ART से जोड़ा गया है, जबकि छह मरीजों तक उपचार की पहुंच सुनिश्चित करना बाकी है।
अन्य स्वास्थ्य केंद्रों पर भी एचआईवी संक्रमण के मामले सामने आए हैं। पीसी सेठी अस्पताल में 4,259 जांच में 17, जिला अस्पताल में 5,135 जांच में 24 और मल्हारगंज पॉलीक्लिनिक में 3,503 जांच में 22 संक्रमित मरीज मिले।
इसके अलावा अरबिंदो अस्पताल में 16, इंडेक्स मेडिकल कॉलेज में 12, महू में 10, बेटमा में 11, सांवेर में आठ और मानपुर में 12 मरीज दर्ज किए गए हैं।
98 प्रतिशत से अधिक मरीज उपचार से जुड़े
आंकड़ों के मुताबिक, पहचाने गए 357 मरीजों में से 351 को उपचार से जोड़ा जा चुका है। यह करीब 98.3 प्रतिशत है। हालांकि, शेष छह मरीजों को उपचार से जोड़ना भी उतना ही महत्वपूर्ण है, ताकि उन्हें समय पर चिकित्सा सहायता मिल सके।
स्वास्थ्य विभाग के लिए अब केवल जांच का दायरा बढ़ाना ही नहीं, बल्कि मरीजों को उपचार की निरंतरता बनाए रखने में सहायता देना भी जरूरी है।
जागरूकता और नियमित जांच पर जोर
‘फर्स्ट 95’ अभियान के तहत 6,313 लोगों की स्क्रीनिंग की गई। ऐसे प्रयास संक्रमण की पहचान और समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने में मददगार हो सकते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, एचआईवी को लेकर जागरूकता बढ़ाना, समय पर जांच कराना और संक्रमित लोगों के प्रति भेदभाव समाप्त करना बेहद जरूरी है। एचआईवी का प्रभावी उपचार उपलब्ध है और ART से संक्रमण को नियंत्रित रखने तथा लंबे समय तक स्वस्थ जीवन जीने में मदद मिलती है।
एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के साथ सामान्य सामाजिक संपर्क, हाथ मिलाने या साथ भोजन करने से संक्रमण नहीं फैलता। इसलिए मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार और सही जानकारी का प्रसार भी जनस्वास्थ्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
