सुप्रीम कोर्ट की सप्लीमेंट्री कॉज लिस्ट में राहुल गांधी की याचिका नहीं, रजिस्ट्री की आपत्तियों से सुनवाई पर असर

देर रात 11:25 बजे जारी हुई सूची में कई याचिकाएं शामिल, लेकिन राहुल गांधी की याचिका का नाम नहीं

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 की कॉज लिस्ट में राहुल गांधी और विपक्षी गठबंधन के अन्य नेताओं की याचिका को जगह नहीं मिलने से मामला चर्चा में है। यह याचिका मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग से जुड़े कथित चुनावी अनियमितताओं के मुद्दे पर दायर की गई है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, याचिका की सुनवाई में देरी की एक अहम वजह सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री द्वारा दस्तावेजों में खामियां दर्ज किया जाना है।

याचिका में मिलीं कई प्रक्रियागत खामियां
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 12 अक्टूबर को दाखिल याचिका में सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने कई प्रक्रियागत कमियां बताई हैं। इनमें जरूरी दस्तावेजों और प्राधिकरण संबंधी कागजात की कमी, कुछ पहचान पत्रों की अस्पष्ट प्रतियां तथा कोर्ट फीस में कमी जैसी आपत्तियां शामिल हैं। इन कमियों को दूर किए बिना याचिका की सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ने में बाधा आ सकती है।

राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी गठबंधन के नेताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। याचिका में चुनाव आयोग के रिकॉर्ड सार्वजनिक करने, मतदाता सूची में हुए बदलावों की स्वतंत्र जांच और प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

कई अन्य याचिकाएं भी चर्चा में

सुप्रीम कोर्ट की कॉज लिस्ट में अलग-अलग पीठों के सामने कई महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई निर्धारित है। मूल रूप से जारी जानकारी में CPI(M) के एमए बेबी, शैलेंद्र मणि त्रिपाठी, मनोज कुमार झा, एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR), सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) और सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) से जुड़े मामलों का उल्लेख किया गया था।

राहुल गांधी की याचिका सूची में शामिल नहीं होने के बाद इसके कारणों पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, केवल कॉज लिस्ट में नाम नहीं होने के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि याचिका को जानबूझकर सुनवाई से बाहर रखा गया है।

अब आगे क्या?

याचिका में दर्ज प्रक्रियागत आपत्तियों को दूर करना और रजिस्ट्री की आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करना आगे की कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण होगा। इसके बाद ही मामले की सुनवाई की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल, याचिका की सुनवाई की निश्चित तारीख और सूचीबद्धता को लेकर आधिकारिक पुष्टि के बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

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