लखनऊ: उत्तर प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था अब देश ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों के विद्यार्थियों को भी आकर्षित कर रही है। अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण (2023-24) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में लगभग छह हजार विदेशी विद्यार्थी उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। रिपोर्ट बताती है कि अंतरराष्ट्रीय छात्रों का सबसे अधिक रुझान स्नातक पाठ्यक्रमों की ओर है।
विदेशी विद्यार्थियों के नामांकन के आंकड़ों के अनुसार, 73.6 प्रतिशत छात्रों ने स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश लिया है। वहीं 16.8 प्रतिशत विद्यार्थियों ने परास्नातक, 3.8 प्रतिशत ने पीएचडी, 2.9 प्रतिशत ने डिप्लोमा और दो प्रतिशत ने इंटीग्रेटेड पाठ्यक्रमों को चुना है। इसके अलावा 0.5 प्रतिशत छात्रों ने पीजी डिप्लोमा तथा 0.4 प्रतिशत ने सर्टिफिकेट कोर्स में दाखिला लिया है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि विदेशी छात्र नियमित डिग्री कार्यक्रमों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
एशियाई देशों के छात्रों की सबसे अधिक भागीदारी
रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में पढ़ाई करने वाले विदेशी विद्यार्थियों में सबसे अधिक संख्या एशियाई देशों के छात्रों की है। इनमें नेपाल, संयुक्त अरब अमीरात, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, भूटान, सऊदी अरब, श्रीलंका, म्यांमार, ईरान और तिब्बती शरणार्थी शामिल हैं। इसके अलावा नाइजीरिया, तंजानिया और केन्या जैसे अफ्रीकी देशों के विद्यार्थी भी प्रदेश के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में अध्ययन कर रहे हैं।
लखनऊ विश्वविद्यालय को 77 देशों से मिले आवेदन
शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए लखनऊ विश्वविद्यालय में 77 देशों से तीन हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। इसे प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था के प्रति बढ़ते अंतरराष्ट्रीय विश्वास का संकेत माना जा रहा है।
उच्च शिक्षा मंत्री ने बताई बढ़ती लोकप्रियता की वजह
उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर ग्रेडिंग मिल रही है। साथ ही डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा दिए जाने से उत्तर प्रदेश की वैश्विक शैक्षणिक पहचान मजबूत हुई है, जिसका सकारात्मक असर विदेशी छात्रों के बढ़ते दाखिलों के रूप में दिखाई दे रहा है।
ऐसे तैयार होती है उच्च शिक्षा की राष्ट्रीय रिपोर्ट
अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण के तहत देशभर के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों से वेब आधारित डेटा कैप्चर फॉर्मेट के माध्यम से विद्यार्थियों के नामांकन, शिक्षकों, कर्मचारियों, आधारभूत सुविधाओं और परीक्षा परिणामों सहित विभिन्न जानकारियां एकत्र की जाती हैं। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर उच्च शिक्षा से जुड़ी नीतियों और योजनाओं का निर्माण तथा उनकी निगरानी की जाती है।
देशभर में उत्तर प्रदेश चौथे स्थान पर
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023-24 में विदेशी विद्यार्थियों के लिए कर्नाटक सबसे पसंदीदा राज्य रहा, जहां 7,914 छात्रों ने दाखिला लिया। इसके बाद पंजाब में 7,902, महाराष्ट्र में 6,190, उत्तर प्रदेश में 5,953 और तमिलनाडु में 5,694 विदेशी विद्यार्थियों ने अध्ययन किया। वहीं विदेशी छात्रों में सबसे अधिक 24.1 प्रतिशत छात्र नेपाल से थे। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका, बांग्लादेश, नाइजीरिया और जिम्बाब्वे के छात्रों की उल्लेखनीय भागीदारी दर्ज की गई।
