आमतौर पर लोग पैरों के दर्द या सुन्नपन को हल्के में ले लेते हैं, लेकिन यही लक्षण कई गंभीर बीमारियों का संकेत भी हो सकते हैं। आयुर्वेद और एक्यूप्रेशर के अनुसार, शरीर के अहम अंग—जैसे आंख, दिमाग, कान, थायराइड, पेट, दिल, फेफड़े, पैंक्रियाज़, किडनी और आंत—सभी का सीधा कनेक्शन पैरों के तलवों से जुड़ा होता है। तलवों में मौजूद अलग-अलग एक्यूप्रेशर पॉइंट्स शरीर के भीतर चल रही गड़बड़ियों के संकेत देने लगते हैं।
तलवों का दर्द और प्लांटर फेशिआइटिस का खतरा
पैरों के तलवों और एड़ियों में होने वाला तेज दर्द कई बार प्लांटर फेशिआइटिस की वजह से होता है। यह पैर के निचले हिस्से में मौजूद एक मोटा, लचीला टिश्यू होता है, जो चलते और दौड़ते समय शॉक एब्जॉर्बर की तरह काम करता है। जब इस हिस्से में ज्यादा तनाव या सूजन आ जाती है, तो तलवों और एड़ियों में असहनीय दर्द शुरू हो जाता है।
इन बीमारियों से जुड़ा हो सकता है पैरों का दर्द
विशेषज्ञों के अनुसार, हाई यूरिक एसिड, डायबिटीज, हाइपोथायराइड, मोटापा, पुराने फ्रैक्चर या फ्लैट फुट की समस्या वाले लोगों को प्लांटर फेशिआइटिस का खतरा ज्यादा रहता है। इसके अलावा, लंबे समय तक एक ही पोजीशन में बैठने या पैर लटकाकर रखने से पैरों का सुन्न हो जाना नर्व्स की कमजोरी का संकेत हो सकता है। अगर यह समस्या बार-बार हो रही है, तो यह शरीर में आयरन की कमी की ओर भी इशारा करती है।
सुन्नपन और दर्द को न करें नजरअंदाज
शरीर के किसी हिस्से में बार-बार सुन्नपन या दर्द होना इस बात का संकेत है कि वहां ब्लड सप्लाई ठीक से नहीं पहुंच पा रही है। ऐसे में इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। समय रहते कारण की पहचान जरूरी है, ताकि बड़ी बीमारी से बचा जा सके।
लाइफस्टाइल डिजीज बन रहीं बड़ी चुनौती
देश में तेजी से बदलती जीवनशैली के चलते लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियां बढ़ती जा रही हैं। आंकड़ों के मुताबिक, करीब 35 प्रतिशत भारतीय किसी न किसी लाइफस्टाइल रोग से जूझ रहे हैं। हर 10 में से एक वयस्क हाइपोथायराइड से पीड़ित है, जबकि तीन में से एक डायबिटीज मरीज को थायराइड की समस्या भी होती है। लगभग 23 प्रतिशत लोग मोटापे का शिकार हैं और 40 प्रतिशत आबादी के पेट पर अतिरिक्त चर्बी जमा है।
खराब दिनचर्या से बढ़ रही हैं ये समस्याएं
गलत खानपान और अनियमित जीवनशैली के कारण लोगों में बीपी, शुगर, हाई कोलेस्ट्रॉल, मोटापा, थायराइड, फेफड़ों की बीमारी, अनिद्रा, गठिया और पोषक तत्वों की कमी जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।
योग और आयुर्वेद से मिल सकता है समाधान
योग और आयुर्वेद को अपनाकर इन बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। योग करने से शरीर में ऊर्जा बढ़ती है, ब्लड प्रेशर और शुगर कंट्रोल में रहती है, वजन संतुलित रहता है, नींद बेहतर होती है और मानसिक तनाव भी कम होता है। आयुर्वेदिक उपायों में सुबह एप्पल विनेगर का सेवन, रात में हल्दी वाला दूध, रोज कुछ देर धूप में बैठना, कम से कम सात घंटे की नींद और नियमित योग को दिनचर्या में शामिल करना फायदेमंद माना जाता है।
