2017 के बाद बदला हाल: कभी हजारों में कमाने वाले अब दीपोत्सव में कमा रहे लाखों

Ayodhya Diwotsav 2025

अयोध्या। दीपोत्सव शुरू होने के बाद से अयोध्या के कुम्हार परिवारों के घरों में खुशहाली का उजाला फैल गया है। जो युवा कभी काम की तलाश में बाहर जाते थे, वे अब अपनी ही धरती पर आत्मनिर्भर बन रहे हैं। योगी सरकार के प्रयासों से शुरू हुए दीपोत्सव ने न केवल अयोध्या की अर्थव्यवस्था को बल दिया है बल्कि पारंपरिक मिट्टी कला को भी नई पहचान दी है।

नौवां दीपोत्सव: नया कीर्तिमान रचने को तैयार अयोध्या

इस बार 26 लाख 11 हजार 101 दीप जलाने का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर दीपोत्सव की तैयारियां युद्धस्तर पर चल रही हैं।
अवध विश्वविद्यालय के छात्र, अधिकारी और स्वयंसेवी संगठन भी इस महाउत्सव को ऐतिहासिक बनाने में जुटे हैं।

कुम्हार परिवारों के लिए दीपोत्सव बना रोजगार का पर्व

जयसिंहपुर गांव के बृज किशोर प्रजापति बताते हैं:

“जबसे दीपोत्सव मनाया जा रहा है, तब से हमारा परिवार लगातार दीए बना रहा है। इस बार हमें दो लाख दीए बनाने का ऑर्डर मिला है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीपोत्सव की परंपरा शुरू कर हमारे जैसे परिवारों को रोजगार से जोड़ा है। अब हम आत्मनिर्भर हैं।”

आधुनिक तकनीक से बढ़ा उत्पादन

अब कुम्हार इलेक्ट्रिक चाक का उपयोग कर रहे हैं।

इससे उत्पादन क्षमता कई गुना बढ़ी है और दीयों की गुणवत्ता भी बेहतर हुई है।

जयसिंहपुर गांव के करीब 40 से अधिक कुम्हार परिवार दिन-रात दीपोत्सव के दीए बनाने में लगे हैं।

2017 से पहले हजारों में कमाई, अब बन रहे लखपति

2017 से पहले ये कुम्हार रोजी-रोटी के लिए संघर्ष करते थे।

अब दीपोत्सव के दौरान ही लाखों रुपये की आमदनी हो जाती है।

पहले महीने में 20–25 हजार रुपये की कमाई होती थी, अब सिर्फ एक सीजन में कई लाख।

सोहावल की पिंकी प्रजापति बताती हैं:

“इस बार हमें एक लाख दीए बनाने का ऑर्डर मिला है। पहले दीए सस्ते बिकते थे, अब सरकार के आह्वान से बाजार में अच्छा रेट मिल रहा है।”

दीपोत्सव ने दी नई पहचान और बाजार

योगी सरकार ने मिट्टी के दीयों को दीपोत्सव में प्राथमिकता दी है।

इससे स्थानीय कुम्हारों को बड़े स्तर पर ऑर्डर मिल रहे हैं।

जयसिंहपुर, विद्याकुण्ड, सोहावल और आसपास के गांवों में उत्सव जैसा माहौल है।

रामभवन प्रजापति, गुड्डू प्रजापति, राजू प्रजापति, जगन्नाथ प्रजापति, सुनील प्रजापति जैसे सैकड़ों परिवार मिट्टी गूंथने, आकार देने और दीए सुखाने-बेचने में जुटे हैं।

जानिए, कब कितने दीप जले
वर्ष जले दीपों की संख्या
2017 1.71 लाख
2018 3.01 लाख
2019 4.04 लाख
2020 6.06 लाख
2021 9.41 लाख
2022 15.76 लाख
2023 22.23 लाख
2024 25.12 लाख

2025 में लक्ष्य – 26 लाख 11 हजार 101 दीप

अयोध्या इस बार एक नया विश्व कीर्तिमान रचने की तैयारी में है।
दीपोत्सव अब केवल धार्मिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह स्थानीय रोजगार, आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बन चुका है।

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