आखिरी वक्त अस्पताल में गुलजार को सौंपीं अपनी डायरियां, मीना कुमारी की अनमोल विरासत आज भी है अमर

मुंबई: हिंदी सिनेमा की ‘ट्रेजडी क्वीन’ कही जाने वाली मीना कुमारी का जीवन जितना शानदार रहा, उतना ही दर्द और अकेलेपन से भी भरा था। अभिनय के साथ-साथ वह शायरी की दुनिया में भी गहरी पकड़ रखती थीं। अपने जीवन के अंतिम दिनों में उन्होंने अपनी सबसे अनमोल धरोहर मशहूर गीतकार, शायर और फिल्मकार गुलजार को सौंप दी थी।

‘बेनजीर’ के सेट पर हुई थी मुलाकात

मीना कुमारी और कमाल अमरोही के रिश्तों में दूरियां बढ़ने के बाद वह गहरे अकेलेपन से गुजर रही थीं। इसी दौरान फिल्म ‘बेनजीर’ के सेट पर उनकी मुलाकात गुलजार से हुई। दोनों के बीच साहित्य, शायरी और संवेदनाओं को लेकर गहरा जुड़ाव बना। गुलजार ने मीना कुमारी को लगातार लिखने के लिए प्रोत्साहित किया और उनकी रचनात्मक प्रतिभा को नई पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

गंभीर बीमारी के बीच भी पूरा किया फिल्म का काम

जीवन के अंतिम दौर में मीना कुमारी लिवर सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं। स्वास्थ्य लगातार बिगड़ने के बावजूद उन्होंने गुलजार के निर्देशन में बनी फिल्म ‘मेरे अपने’ की शूटिंग पूरी की। खराब सेहत के बावजूद उन्होंने अपने पेशे और काम के प्रति प्रतिबद्धता बनाए रखी।

अस्पताल के बिस्तर पर गुलजार को सौंपीं अपनी डायरियां

31 मार्च 1972 को दुनिया को अलविदा कहने से पहले मीना कुमारी ने अस्पताल में अपनी निजी डायरियां गुलजार को सौंप दीं। इन डायरियों में उनकी लिखी नज्में, शायरी और जीवन के दर्द भरे अनुभव दर्ज थे। उन्हें विश्वास था कि उनके शब्दों और भावनाओं की असली अहमियत गुलजार ही समझ पाएंगे।

गुलजार ने निभाया भरोसा

मीना कुमारी के निधन के बाद गुलजार ने उनकी डायरियों और बिखरी हुई रचनाओं को सुरक्षित रखा। बाद में उन्होंने इन्हें संकलित कर पुस्तक के रूप में प्रकाशित कराया, जिससे दुनिया मीना कुमारी के उस साहित्यिक व्यक्तित्व से भी परिचित हुई, जो उनकी अभिनय प्रतिभा जितना ही प्रभावशाली था।

 

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