राम मंदिर दान चोरी मामला: चोरी पकड़ने के बाद एफआईआर क्यों नहीं हुई? चंपत राय की भूमिका पर उठे बड़े सवाल

अयोध्या: राम मंदिर दान चोरी मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ अब पूर्व महासचिव चंपत राय की भूमिका को लेकर नए सवाल उठ रहे हैं। सामने आई जानकारी के अनुसार, दान चोरी का मामला सार्वजनिक होने से पहले ही चोरी का पता चल गया था और पुलिस की मदद से कथित रूप से धनराशि भी बरामद कर ली गई थी। इसके बावजूद तत्काल एफआईआर दर्ज नहीं कराए जाने को लेकर विवाद गहरा गया है।

चोरी का पता चलने के बाद भी नहीं दर्ज हुई रिपोर्ट

जानकारी के मुताबिक, 5 जून को दान चोरी का मामला सामने आने के बाद संबंधित आरोपियों तक पहुंचकर कथित रूप से चोरी की रकम भी बरामद की गई थी। हालांकि, उस समय पुलिस में औपचारिक मामला दर्ज नहीं कराया गया। बाद में यह मामला सार्वजनिक होने के बाद जांच तेज हुई और पूरे घटनाक्रम ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया।

एफआईआर होती तो विवाद टलने की चर्चा

मामले से जुड़े घटनाक्रम को लेकर यह चर्चा है कि यदि शुरुआती चरण में ही एफआईआर दर्ज करा दी जाती और कानूनी कार्रवाई शुरू हो जाती, तो बाद में पैदा हुए विवाद से बचा जा सकता था। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि उस समय प्राथमिकी दर्ज न कराने का निर्णय किन परिस्थितियों में लिया गया।

चंपत राय की भूमिका पर उठे सवाल

राम मंदिर निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा के दौरान प्रमुख भूमिका निभाने वाले चंपत राय पिछले कुछ वर्षों में मंदिर प्रबंधन का प्रमुख चेहरा रहे। अब दान चोरी प्रकरण के बाद उनकी कार्यशैली और निर्णयों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि इस पूरे मामले की जांच जारी है और आधिकारिक स्तर पर किसी निष्कर्ष की घोषणा नहीं की गई है।

पूर्व डीजीपी ने भी उठाए कानूनी सवाल

पूर्व पुलिस महानिदेशक विक्रम सिंह ने भी इस मामले में ट्रस्ट के जिम्मेदार पदाधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि चोरी की रकम बरामद हुई थी तो औपचारिक एफआईआर दर्ज क्यों नहीं कराई गई। साथ ही उन्होंने यह भी सवाल किया कि तलाशी और बरामदगी जैसी कार्रवाई किस अधिकार के तहत की गई तथा संबंधित प्रक्रियाओं का पालन क्यों नहीं हुआ।

जांच के बाद ही तय होगी जिम्मेदारी

दान चोरी मामले की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) कर रहा है। जांच एजेंसी पूरे घटनाक्रम, संबंधित दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जिम्मेदारियों का निर्धारण कर रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट और साक्ष्यों के आधार पर तय होगी।

 

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