वाराणसी। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद को लेकर अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद एवं राष्ट्रीय बजरंग दल के संस्थापक डॉ. प्रवीण तोगड़िया ने गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि जिन पर हिंदू समाज को एक रखने की जिम्मेदारी है, वही आज बंटे हुए नजर आ रहे हैं। यदि हिंदू समाज इसी तरह विभाजित रहा तो भारत में उसका अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।
डॉ. तोगड़िया ने कहा कि शंकराचार्य पीठ से जुड़ा जो विवाद खड़ा हुआ है, उससे पूरा हिंदू समाज दुखी है और वे स्वयं भी इससे आहत हैं। उन्होंने इस विवाद के शीघ्र समाधान की अपील करते हुए कहा कि ढाई हजार साल पुरानी शंकराचार्य पीठ की परंपरा है और उतनी ही पुरानी गोरक्षनाथ पीठ की भी परंपरा रही है। उन्होंने दोनों पीठों के संतों से मिलकर आपसी संवाद के जरिए समाधान निकालने का आग्रह किया।
माघ मेले को लेकर उन्होंने कहा कि साधु-संतों को सम्मानपूर्वक स्नान कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
काशी के मणिकर्णिका घाट मूर्ति विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. तोगड़िया ने कहा कि हर क्षेत्र में सही-गलत का निर्धारण करने वाला एक कोतवाल होता है और काशी के कोतवाल स्वयं भगवान काल भैरव हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई कार्य सत्य और धर्म के अनुरूप है तो भगवान काल भैरव उसकी रक्षा करेंगे, और यदि वह अधर्म है तो उसका दंड भी वही देंगे। इस मामले को उन्होंने काल भैरव पर छोड़ देने की बात कही।
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