लखनऊ। आगामी वर्ष 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले बसपा को लेकर चल रहे गठबंधन के कयासों पर पार्टी सुप्रीमो मायावती ने बुधवार को स्पष्ट कर दिया कि बसपा अकेले अपने दम पर चुनाव लड़ेगी। उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्टियां और मीडिया यह भ्रम फैला रहे हैं ताकि हमारे नेताओं और कार्यकर्ताओं का ध्यान भटकाया जा सके।
बसपा की रणनीति और ऐलान
मायावती ने बताया कि नौ अक्टूबर को कांशीराम की पुण्यतिथि पर लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने खुले मंच से चुनाव अकेले लड़ने की घोषणा कर दी थी। इसके बाद भी कई मौकों पर यह बात दोहराई जा चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब इस पर किसी प्रकार की चर्चा या बहस की आवश्यकता नहीं है।
विरोधियों और गठबंधन की राजनीति पर नजर
बसपा सुप्रीमो ने कहा कि कांग्रेस, सपा और भाजपा की सोच संकीर्ण है और ये सभी डॉ. बीआर आंबेडकर के विचारों के विरोधी हैं। इन पार्टियों के साथ गठबंधन में बसपा को हमेशा नुकसान ही होता है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे ऐसी साजिशों से गुमराह न हों और हाथी की मस्त चाल चलते रहें। 2027 में बसपा की सरकार बनाने के लिए लगातार प्रयास करते रहें।
सुरक्षा और बंगले को लेकर स्पष्टिकरण
मायावती ने दिल्ली में नया बंगला आवंटित होने को लेकर भी चर्चा का जवाब दिया। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने सुरक्षा कारणों से उन्हें टाइप-8 का बंगला दिया है। उन्होंने याद दिलाया कि सपा की सरकार के समय 2 जून 1995 को स्टेट गेस्ट हाउस में उन पर जानलेवा हमला हुआ था। इसके बाद सुरक्षा बढ़ाई गई और अब भी बढ़ते खतरे के मद्देनजर यह बंगला आवंटित किया गया है।
एआई और देश की प्राथमिकताओं पर कटाक्ष
इस दौरान बसपा प्रमुख ने बिना सीधे नाम लिए एआई समिट पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि देश और जनता के वास्तविक हितों के बजाय वर्तमान में ‘‘अर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को सफलता की कुंजी बताने’’ की चर्चाएं स्वार्थी और भ्रमपूर्ण हैं। उनका इशारा यह था कि तकनीकी नवाचारों के नाम पर लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।
