मशहूर गायिका आशा भोसले के निधन से पूरे देश में शोक की लहर है। उनके जाने से संगीत जगत में एक ऐसा खालीपन पैदा हो गया है, जिसकी भरपाई कर पाना मुश्किल माना जा रहा है। इस बीच गजल गायक सुदीप बनर्जी ने उनके साथ बिताए खास पलों को याद करते हुए कई भावुक और प्रेरणादायक बातें साझा की हैं। उन्होंने हाल ही में उनके साथ की गई रिकॉर्डिंग और एक पुराना अनुभव साझा करते हुए उनकी शख्सियत और समर्पण को करीब से बयान किया।
संगीत के प्रति समर्पण और सादगी ने किया प्रभावित
एक इंटरव्यू में सुदीप बनर्जी ने बताया कि कुछ ही महीने पहले उन्हें आशा भोसले के साथ फिर से काम करने का मौका मिला था। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी गायिका होने के बावजूद आशा भोसले का व्यवहार बेहद विनम्र और सम्मानजनक था। वह संगीत निर्देशक और पूरी टीम के साथ गाने की हर बारीकी पर विस्तार से चर्चा करती थीं। सुदीप के मुताबिक, वह अक्सर उन्हें अपने घर बुलाती थीं और घंटों बैठकर गीत के बोल, धुन और भाव को समझती थीं, जो आज के दौर में कम ही देखने को मिलता है।
आज के दौर से अलग था उनका काम करने का तरीका
सुदीप बनर्जी ने बताया कि जहां आजकल कई गायक तकनीक के सहारे दूर से ही गानों की रिकॉर्डिंग पूरी कर लेते हैं, वहीं आशा भोसले पुराने दौर की तरह पूरी टीम के साथ बैठकर काम करना पसंद करती थीं। उनके लिए गाना सिर्फ रिकॉर्डिंग नहीं, बल्कि एक सामूहिक प्रक्रिया थी, जिसमें हर छोटी से छोटी चीज पर ध्यान दिया जाता था।
उम्र नहीं, जुनून बोलता था स्टूडियो में
सुदीप ने यह भी खुलासा किया कि यह पहली बार नहीं था जब उन्होंने आशा भोसले के साथ काम किया। पहले भी जब उन्होंने उनके साथ काम किया था, तब उनकी उम्र करीब 80 साल थी। हालिया रिकॉर्डिंग के दौरान वह 92 साल की थीं। सुदीप को लगा था कि शायद वह स्टूडियो आने में असमर्थ होंगी, लेकिन उन्होंने खुद आने की इच्छा जताई और पूरे समर्पण के साथ काम किया। सुदीप के अनुसार, उन्हें स्टूडियो में काम करते देखना किसी जादुई अनुभव से कम नहीं था।
तीन घंटे तक बिना रुके खड़े होकर की रिकॉर्डिंग
इस अनुभव को याद करते हुए सुदीप बनर्जी ने बताया कि रिकॉर्डिंग से पहले वे उनके घर पर मिले, जहां आशा भोसले ने खुद खाना बनाकर खिलाया। बातचीत के दौरान वह अलग-अलग भाषाओं में सहजता से संवाद करती थीं। स्टूडियो पहुंचने के बाद जो हुआ, वह और भी हैरान करने वाला था। सुदीप के मुताबिक, जिस उम्र में लोग ठीक से चल भी नहीं पाते, उस उम्र में आशा भोसले ने बिना किसी सहारे के लगातार तीन घंटे तक खड़े रहकर गाना रिकॉर्ड किया। यह उनके अद्भुत समर्पण और ऊर्जा का प्रमाण है।
