भागलपुर के सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय में हुए चर्चित हत्याकांड के बाद पुलिस ने महज 12 घंटे के भीतर बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी रामधनी यादव को मुठभेड़ में मार गिराया। कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण कुमार की हत्या और नगर सभापति राजकुमार उर्फ गुड्डू पर जानलेवा हमले के मामले में आरोपी को पुलिस ने देर रात गिरफ्तार किया था।
पुलिस के मुताबिक, हथियारों की बरामदगी के लिए ले जाने के दौरान आरोपी ने भागने और हथियार छीनने की कोशिश की, जिसके बाद हुई मुठभेड़ में उसकी मौत हो गई। इस कार्रवाई में तीन पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं।
नगर परिषद कार्यालय में दिनदहाड़े हुई थी हत्या
मंगलवार को सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय में अपराधियों ने दिनदहाड़े घुसकर ताबड़तोड़ फायरिंग की थी। इस हमले में कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण कुमार की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि नगर सभापति राजकुमार उर्फ गुड्डू पर भी जानलेवा हमला किया गया था।
घटना के बाद पूरे प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मच गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू की और रातभर छापेमारी अभियान चलाया।
हथियार बरामदगी के दौरान हुआ पुलिस पर हमला
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बुधवार तड़के विशेष टीम आरोपी रामधनी यादव को हत्या में इस्तेमाल हथियारों की बरामदगी के लिए एक गुप्त स्थान पर लेकर गई थी। सुबह करीब 4 से 5 बजे के बीच जैसे ही पुलिस टीम वहां पहुंची, पहले से घात लगाए बदमाशों ने पुलिस पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी।
इसी दौरान हिरासत में मौजूद रामधनी यादव ने भी भागने और पुलिसकर्मियों से हथियार छीनने की कोशिश की। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की।
15 से 20 मिनट तक चली मुठभेड़
पुलिस और बदमाशों के बीच करीब 15 से 20 मिनट तक मुठभेड़ चली। इस दौरान रामधनी यादव को कई गोलियां लगीं और वह गंभीर रूप से घायल होकर मौके पर गिर पड़ा। उसके अन्य साथी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार होने में सफल रहे।
घायल आरोपी और तीन पुलिसकर्मियों को तुरंत भागलपुर के मायागंज अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने रामधनी यादव को मृत घोषित कर दिया। वहीं घायल जवानों का इलाज जारी है।
पुलिस ने दिया सख्त संदेश
इस पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस का कहना है कि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी और फरार आरोपियों की तलाश में छापेमारी की जा रही है।
नगर परिषद कार्यालय में हुई हत्या ने पूरे बिहार प्रशासन को झकझोर दिया था। ऐसे में मुख्य आरोपी के 12 घंटे के भीतर मुठभेड़ में मारे जाने को पुलिस की बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।
